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फड़नवीस के गुरु बने योगी !

By Shakti Prakash Shrivastva on February 17, 2025
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                                                                                   शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नम: इसका शाब्दिक अर्थ ये है कि गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। इसीलिए सनातनी संस्कार में आदिकाल से ही गुरु को अहम दर्जा दिए जाने का चलन है। ऐसे में यहाँ यह प्रश्न उठना लाजिमी है कि भारतीय राजनीति में ऐसा क्या हो गया जो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने गुरु की भूमिका में रखना पड़ा। इसका सही उत्तर जानने के लिए सनातनी आस्था व विश्वास के सबसे बड़े आयोजन महाकुंभ को समझना होगा। इस बार महाकुंभ का आयोजन प्रयागराज में किया जा रहा है। यहा के बारे में ऐसी मान्यता है कि गंगा-यमुना और सरस्वती के संगम में स्नान करने से पुण्य लाभ की प्राप्ति होती है। इस बार इसी पुण्य लाभ की प्राप्ति के लिए देश ही नहीं दुनिया भर से श्रद्धालु प्रयागराज पहुँच रहे हैं। अभी तक रिकार्डतोड़ 50 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई है। जबकि महाकुंभ के 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के अंतिम अमृत स्नान सम्पन्न होने में अभी हफ्ते भर से ज्यादा का समय है। इस तरह करोड़ों-करोड़ श्रद्धालुओं की तादाद ने इस महाकुंभ को दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बना दिया है। आयोजन में इतनी बड़ी श्रद्धालुओं की तादाद को व्यवस्थित व प्रबंधित करने के लिए देश ही नहीं पूरी दुनिया में प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की वाहवाही हो रही है। साल भर बाद यानि 2027 में महाराष्ट्र के नासिक जिले में गोदावरी नदी के तट पर कुम्भ का आयोजन होना है। वहाँ की व्यवस्था कैसे सुरक्षित व व्यवस्थित हो इसके लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद मांगी है। योगी ने भी गुरु की माफिक उन्हे सभी योजनाएं और तौर-तरीका साझा करने का भरोसा दिया है।

पौराणिक मान्यता की मुताबिक कुम्भ या महाकुंभ आयोजन का सीधा संबंध समुद्र मंथन से है। समुद्र मंथन के दौरान मंथन से निकले अमृत की कुछ बूंदे छलक कर पृथ्वी पर पड़ी थी। जिन चार जगहों पर ये बूंदें पड़ी उनमे उत्तर प्रदेश का प्रयागराज, महाराष्ट्र का नासिक, मध्य प्रदेश का उज्जैन और उत्तराखंड का हरिद्वार शुमार है। इन स्थानों पर प्रत्येक छः वर्षों में एक बार अर्धकुम्भ और बारह वर्षों में कुम्भ का आयोजन किया जाता है। कुम्भ जब बारहवीं बार आयोजित होता है तो उसे महाकुंभ कहा जाता है। प्रयागराज में इस बार महाकुंभ ही है। यह अवसर एक सौ चौवलिस साल बाद आता है। इसी दीर्घकालिक अवधि के चलते हर सनातनी इस बार संगम मे डुबकी लगाने को बेताब है। श्रद्धालुओं की इसी बेताबी ने रिकार्ड तोड़ भीड़ का शक्ल अख्तियार कर लिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर योगी आदित्यनाथ जैसे संत की मौजूदगी ने ही आज करोड़ों-करोड़ श्रद्धालुओ की मौजूदगी के बावजूद आयोजन को स्वच्छता, सुरक्षा, व्यवस्था जैसे अनेकानेक पहलुओं पर रिकार्ड कायम करते हुए आयोजन को अप्रतिम दिव्य और भव्य बना डाला है। उनके इसी कौशल को अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस सीखना चाहते है। वो चाहते है कि 2027 में नासिक कुम्भ में भी व्यवस्था कुछ ऐसी ही दिव्य और भव्य हो। इसके लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर महाराष्ट्र सरकार के अलाधिकारी प्रयागराज पहुँच रहे है। इसके लिए योगी आदित्यनाथ फड़नवीस के लिए गुरु की भूमिका निभा रहे है।

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