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October 8, 2026
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बीजेपी को एक अदद शिंदे की दरकार!

By Shakti Prakash Shrivastva on February 16, 2025
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                                                                              शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

दिल्ली में आम आदमी पार्टी को मिली करारी हार के बाद उसके ऊपर अब पंजाब में भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। क्योंकि बीजेपी ने आम आदमी पार्टी को अपने निशाने पर ले लिया है। वो चाहती है कि किसी भी तरह कोई अवसर मिले तो पंजाब में काबिज आम आदमी पार्टी की सरकार को बाहर का रास्ता दिखाया जा सके। इसके लिए बीजेपी ने पंजाब में अपनी सियासी घेराबंदी तेज कर दी है। उसे महाराष्ट्र सरकार चला रही शिवसेना से जिस तरह एकनाथ शिंदे को मिलाकर न केवल सरकार गिरा दी थी बल्कि शिवसेना पार्टी को भी दो हिस्सों में बांट दिया था। ठीक उसी तर्ज पर बीजेपी पंजाब में भी आम आदमी पार्टी में एक अदद एकनाथ सरीखे नेता की तलाश करने में जुट गई है।

वैसे भी पंजाब में बीजेपी का कोई मजबूत आधार नहीं है। वहाँ अभी तक वो अकाली दल के कंधों पर बैठ सियासत करती चली आ रही थी लेकिन पिछले दिनों कृषि कानूनों के मुद्दे पर अकाली दल ने किसान हितों के चलते बीजेपी सहित राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबंधन से किनारा कस लिया। केंद्र सरकार में अकाली दल सुप्रीमो सुखबीर बादल की पत्नी हरसिमरत कौर मंत्री थी लेकिन उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि बीजेपी ने पंजाब चुनाव में अकाली दल की कमी पूरी करने के लिए कांग्रेस के बागी कैप्टन अमरिंदर सिंह का साथ पकड़ा लेकिन उससे कोई फायदा बीजेपी को नहीं मिला। अब बीजेपी पंजाब में महाराष्ट्र में खेले गए सियासी कार्ड के जरिए एक तीर से कई निशाने साधना चाहती है। एक तो ये कि यदि आम आदमी पार्टी पंजाब में से कोई एकनाथ शिंदे, अजित पवार या ज्योंतिरादित्य सिंधिया सरीखा नेता मिल जाए तो महाराष्ट्र की तर्ज पर पंजाब की सत्ता पर काबिज हो सकती है। दूसरा दिल्ली, पंजाब के रास्ते राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र जैसे राज्यों के जरिए बीजेपी को चुनौती देंने वाली आम आदमी पार्टी को और मजबूत बनने से पहले ही इतना कमजोर कर दिया जाए कि उसकी मौजूदगी और ना मौजूदगी का बीजेपी के लिए कोई मायने नहीं रह जाए।

हालांकि दिल्ली में जिस तरह 70 में 48 पर बीजेपी और 22 पर आम आदमी पार्टी को जीत मिली है। उसमे मुख्य प्रतिद्वंदी बीजेपी के अलावा उसके विपक्षी गठबंधन के मुख्य घटक दल कांग्रेस भी विरोध में खड़ी नजर आई। इससे आम आदमी पार्टी के लिए चुनौतियाँ वहाँ बढ़ गईं। कांग्रेस के चलते पार्टी को खासा नुकसान उठाना पड़ा। अब पंजाब के संदर्भ में भी स्थितियाँ अधिक विकट इसलिए हो गई है क्योंकि पंजाब में भी उसके दो मजबूत प्रतिद्वंदी हो गए है। जिनसे पार पाना पार्टी संयोजक अरविन्द केजरिवल और उनकी आम आदमी पार्टी के लिए  आसान नहीं होगा। हालांकि अरविन्द केजरिवाल भी अब परिपक्व हो चुके है। उन्हे भी इस स्थिति का अंदाजा लग गया है। यही वजह है कि दिल्ली में मिली करारी के बावजूद केजरिवल ने बिना देरी किये पंजाब के मुखयमन्त्री समेत सभी नेताओं को दिल्ली बुलाया लिया। दिल्ली में उन्हे बड़ी सियासी तरीके से अतीत के उदाहरण देते हुए सतर्कता बरतने की सलाह दे दी है। फिलहाल तो ऐसी कोई बहुत खतरनाक सियासी संकेत नहीं मिल रहे है। लेकिन निकट भविष्य में संभव है कि कुछ ऐसे घटनाक्रम हो जो पार्टी के भविष्य के लिए मुफीद न हो।

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