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क्या उपचुनावों में खुल गई बीजेपी के सियासी ढोल की पोल!

By Shakti Prakash Shrivastva on July 15, 2024
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                                                                                                    शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

बीते दिनों आए विधानसभा उपचुनावों के परिणामों के आंकड़ों में  जिस तरह बीजेपी सिमटते हुए नजर आ रही है उससे क्या यह माना जाए कि अब बीजेपी का सबसे बड़ा सियासी ट्रम्प धर्म निष्प्रभावी हो चला है। या बीजेपी के धर्म का पोल जनता के सामने खुल गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने तो रविवार को सैफई स्थित अपने आवास पर मीडिया से मुखातिब हो कहा कि उप चुनाव में बीजेपी के धर्म का ढोल फट गया है। रामगोपाल इतने पर ही नहीं रुके उन्होंने कहा कि आने वाले चुनावों में बीजेपी का सूपड़ा साफ होना तय है। हाल ही में सात राज्यों की 13 विधानसभा सीटों के लिए सम्पन्न हुए उपचुनाव में बीजेपी को मात्र दो ही सीटों पर विजय मिल सकी है। 11 सीटों पर उसे हार का सामना करना पड़ा है।

जबकि आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि ऐसा नहीं है। सात राज्यों के जिन 13 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव हुए थे उनमे से पश्चिम बंगाल की तीन सीटें वहाँ की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी को हराकर जीती हैं। जबकि मध्यप्रदेश में एक सीट बीजेपी ने कांग्रेस से छीन ली है। इस तरह कुल मिलाकर बीजेपी के लिए 13 में 2 की संखया से बहुत हताशा पैदा हो जाने जैसी कोई बात नहीं है। उत्तराखंड की बदरिधाम की सीट वैसे 2022 में भी कांग्रेस ने ही जीती थी। जहां तक उत्तराखंड की दूसरी मंगलौर सीट की बात करें तो वहाँ भी पहले बीएसपी काबिज थी। लिहाजा इन दोनों ही सीटों पर बीजेपी काबिज नहीं थी। अलबत्ता बदरीधाम सीट पर हुई हार से उपजे सियासी हालात ने विपक्षियों को यह कहने का हक तो दे ही दिया है कि अयोध्या संसदीय सीट गँवाने के बाद बीजेपी ने भगवान विष्णु के गढ़ बदरीधाम में भी हार गई। मतलब साफ है कि विपक्षी दल जोर-शोर से बीजेपी के धर्म के दावे को सियासत में खोखला बताने का एक सियासी मसाला तो पा ही गए हैं।  सपा सांसद रामगोपाल का मानना है कि अभी ही नहीं आने वाले जिन-जिन प्रदेशों में विधानसभा के चुनाव होने वाले है वहाँ बीजेपी को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ेगा। सियासी गलियारे में गूंज रह बातों पर यकीन करे तो 22 जनवरी को अयोध्या में हुए राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को जिस तरह से बीजेपी ने कारपोरेट आयोजन की तरह आयोजित किया था उससे यही लगता था कि बीजेपी इसे लोकसभा चुनाव में भुनाने की कोशिश करेगी। बीजेपी ने चुनाव के दौरान प्रयास किया भी लेकिन जब चुनाव के नतीजे आए तो नतीजों ने यह साबित कर दिया कि उसका देश के आम मतदाताओं के ऊपर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा। लिहाजा देश में पिछले लोकसभा चुनाव में 303 सीटों पर रहने वाली बीजेपी के लोकसभा सांसदों की संखया 240 तक सिमट कर रह गई। इन परिणामों ने इतना तो कर ही दिया है कि अब बीजेपी को आगामी चुनावों के लिए विशेष सियासी तैयारी करनी होगी।

 

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