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दिल्ली में जिसकी रफ्तार केंद्र में उसकी सरकार

By Shakti Prakash Shrivastva on May 17, 2024
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                                                                                                  शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

लोकसभा चुनाव के सात चरणीय प्रक्रिया में अभी तक चार चरण के मतदान सम्पन्न हो चुके हैं। अब सियासी दलों सहित आम-अवाम में इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि किसकी केंद्र में सरकार बन रही है। ऐसे में बात अगर देश की राजधानी दिल्ली की बात की जाए तो दिल्ली का सियासी अतीत इस बात की चुगली करता है कि जिसकी दिल्ली की सात सीटों पर हनक रही है वही पार्टी केन्द्रीय सत्ता की कुर्सी पर काबिज होता रहा है।  दिल्ली में हालांकि मतदान छठे चरण में 25 मई को होना है। सभी दलों ने अपने-अपने क्षत्रपो को प्रचार में उतार दिया है। वर्तमान में दिल्ली की सभी 7 सीटों पर बीजेपी का कब्जा है। इस बार बीजेपी की चुनौती पहले की अपेक्षा बढ़ी है क्योंकि यहाँ इस बार राज्य में सत्ता संभाल रही आम आदमी पार्टी और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ रही है। बीजेपी ने अपने सभी उम्मीदवारों में सिर्फ मनोज तिवारी को छोड सभी छः सीटों पर प्रत्याशी बदल दिए हैं। जबकि बीजेपी से सामने की टक्कर दे रही आइएनडीआइए गठबंधन की तरफ से आम आदमी पार्टी 4 और काँग्रेस 3 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

नई दिल्ली सीट पर बीजेपी की तेजतर्रार नेत्री रही सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज लड़ रही है जबकि उनके सामने आप के सोमनाथ भारती है।
चांदनी चौक से बीजेपी से प्रवीण खंडेलवाल और कांग्रेस ने जेपी अग्रवाल पर दांव खेला है। पूर्वी दिल्ली सीट से बीजेपी ने हर्ष मल्होत्रा को टिकट दिया है जबकि आप से कुलदीप कुमार मैदान में हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली से बीजेपी ने एक बार फिर से मनोज तिवारी को मौका दिया है जबकि इसी सीट से कांग्रेस के टिकट पर कन्हैया कुमार अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं। उत्तर-पश्चिमी दिल्ली से बीजेपी के योगेंद्र चंदौलिया के सामने कांग्रेस उम्मीदवार उदित राज है। पश्चिमी दिल्ली से बीजेपी ने कमलजीत शहरावत को मौका दिया है जबकि आप ने महाबल मिश्रा पर भरोसा जताया है। दक्षिणी दिल्ली से रामवीर सिंह बिधूड़ी बीजेपी के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं जबकि उनके सामने आप के सहीराम पहलवान है।
पिछले ढाई दशक के आंकड़ों पर यदि गौर करें तो ऐसा लगेगा कि दिल्ली राज्य में जिस पार्टी की धमक रही है उसी पार्टी की केंद्र में सरकार बनी है।  1998 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने दिल्ली की 7 में से 6 सीटें जीती थी।  केंद्र में उसके गठबंधन की सरकार बनी। इसी तरह 1999 में हुए चुनाव में बीजेपी ने सभी 7 सीटों पर जीत हासिल की और केंद्र में सहयोगियों के साथ मिलकर फिरसे सरकार बनाई। 2004 में कांग्रेस ने दिल्ली की 7 में से 6 सीटें जीती और केंद्र में उसके गठबंधन की सरकार बनी। 2009 में कांग्रेस ने सभी 7 सीटें जीती और केंद्र में उसकी सरकार दुबारा बनी। इसी तरह 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने दिल्ली में क्लीन स्वीप किया और दोनों ही बार केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार बनी।

वोट प्रतिशत के लिहाज से देखें तो 2004 औ 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने दिल्ली में बेहतर प्रदर्शन किया। पार्टी को 2004 में दिल्ली की 7 में से 6 सीटों पर जीत मिली। उसे 55% वोट मिले थे। वहीं 2009 के चुनाव में कांग्रेस ने 7 में से सभी 7 सीटें फतह कर ली। इस बार उसका वोट शेयर बढ़कर 57% हो गया। 2014 में नरेंद्र मोदी नाम की सुनामी में कांग्रेस साफ हो गई। उसे एक भी सीट नही मिली और उसका वोट शेयर गिरकर 15% हो गया।  जबकि 2019 के चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर बढ़कर 23% तो हुआ लेकिन इसके बावजूद भी उसे कोई सीट नहीं मिली।  दोनों ही चुनावों में सभी सीटें बीजेपी की झोली में रही। 2014 में उसका वोट शेयर 46% और 2019 में 57% रहा। इससे पहले 2004 के चुनाव में बीजेपी को एक सीट पर जीत मिली थी जबकि 2009 के चुनाव में उसे कोई सीट नहीं मिली थी। 2014 और 2019 के चुनाव में दिल्ली सरकार चला रही आम आदमी पार्टी  भी बैकफुट पर रही।

दिल्ली के मतदाताओं का सियासी चरित्र कुछ ऐसा है कि वो राज्य सरकार के लिए तो आम आदमी पार्टी का समर्थन करता है लेकिन केंद्र सरकार बनाने के वक्त वो बीजेपी के साथ चला जाता है। ऐसे में इस बार अगर आंकड़ों पर यकीन करें तो ऐसा लगता है कि जो पार्टी दिल्ली की सीटों पर बढ़त बनाएगी वही केंद्र की कुर्सी तक पहुंचेगी।

 

 

 

 

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