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October 8, 2026
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फिर बँटेगा उत्तर प्रदेश !

By Shakti Prakash Shrivastva on May 14, 2024
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                                                                                                शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

लोकसभा चुनाव के संदर्भ में भी देखें तो उत्तर प्रदेश लोकसभा सीटों की  लिहाज से देश का सबसे बड़ा सूबा है। यहाँ देश की सर्वाधिक आसी लोकसभा सीटें हैं। सीटों की इतनी बड़ी संख्या होने की वजह से ही देश की सियासत में उत्तर प्रदेश का खासा महत्व है। यहाँ के मुख्यमंत्री की अहमियत भी अन्य की तुलना में अधिक होती है। यही वजह है कि यह सूबा कइयों की आँखों में चुभता भी है। इसके चलते ही कई बार विकास के नाम पर इस प्रदेश को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटने की मांग उठी। कई राजनैतिक और कई गैर राजनीतिक लोगों ने  इसके लिए आंदोलन भी चलाया। पूर्वी उत्तर प्रदेश में सपा के विधायक रहे सुरेश यादव, वीरेंद्र प्रताप शाही, शतरुद्ध प्रकाश, डॉ सुधाकर पाण्डेय, राज्यपाल रहे मधुकर दिघे, डॉ संजयन  त्रिपाठी सरीखे नेताओं ने पूर्वाञ्चल राज्य बनाने के लिए नब्बे के दशक में जबरदस्त आंदोलन चलाया। ऐसे ही बुंदेलखंड राज्य के लिए फिल्म अभिनेता राजा बुंदेला ने भी वर्षों तक मुहिम चलाई। इसी तरह पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की जबर्दस्त माग उठी। लेकिन मामला उत्तराखंड की तरह परवान नहीं चढ़ सका। हालांकि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री रही  और बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में बाकायदा राज्य को चार हिस्सों में बांटने का ड्राफ्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेज भी दिया था। लेकिन केंद्र में विपरीत विचार  धारा वाली पार्टी की सरकार  होने की वजह से यह मसौदा अंजाम तक नहीं पँहुच सका। लेकिन अब ऐसे में जबकि प्रदेश में लोकसभा चुनाव की गहमा-गहमी चल रही है बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर प्रदेश को छोटे-छोटे राज्यों में बांटने की हिमायती चाल चल दी है। अगर मायावती की मंशानुरूप परिस्थितियाँ बनी तो यह तय है कि एक बार फिर उत्तर प्रदेश बँटेगा।

अपने प्रत्याशियों के लिए चुनाव प्रचार में निकली मायावती इन दिनों अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए प्रदेश में जगह-जगह रैलियाँ-जनसभाएं कर रही हैं। बीते सोमवार को एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद उनकी पार्टी के केन्द्र की सत्ता में आने पर ‘अवध क्षेत्र’ को अलग राज्य बनाया जाएगा।  मायावती ने लखनऊ, मोहनलालगंज, रायबरेली और अमेठी लोकसभा सीट से पार्टी उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित एक जनसभा में उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन के अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा, ”लखनऊ से अवध क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से मांग रही है कि अवध को अलग राज्य बनाया जाए।  जब केंद्र में हमारी पार्टी सत्ता में आएगी तो अवध क्षेत्र को अलग से राज्य बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में ही लखनऊ भी आता है।

उत्तर प्रदेश में 2007 से लेकर 2012 तक बहुजन समाज पार्टी  की सरकार थी। पार्टी सुप्रीमो मायावती सूबे की मुख्यमंत्री थी। नवंबर 2011 में उन्होंने उत्तर प्रदेश को चार राज्यों पूर्वांचल, पश्चिम प्रदेश, अवध प्रदेश और बुन्देलखंड में बांटने का एक विधेयक पारित किया था।  न केवल पारित किया बल्कि उसे औपचारिक अनुमोदन  के लिए केंद्र सरकार को भेज भि दिया। हालांकि, केंद्र की तत्कालीन कांग्रेसनीत गठबंधन सरकार ने कई स्पष्टीकरण मांगते हुए उसे राज्य सरकार के पास वापस लौटा दिया था।  आज लगभग तेरह वर्षों बाद बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने अपनी राज्य विभाजन संबंधी मंशा फिर से जनता की अदालत में रख दिया है। साथ ही अपना संकल्प भी जाहिर कर दिया कि केंद्र की सत्ता में आने पर न केवल राज्य को चार हिस्सों में विभाजित किया जाएगा बल्कि अपने चार बार के शासन की ही तरह सर्वजन हितकारी सरकार केंद्र में चलाया जाएगा।

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