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चलन तोड़ेंगे चिराग !

By Shakti Prakash Shrivastva on March 25, 2024
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

           लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक स्व रामविलास पासवान के चिराग यानि मौजूदा पार्टी के एक धडे लोक जनशक्ति पार्टी (आर) के अध्यक्ष और उनके पुत्र चिराग पासवान का पार्टी में एक अरसे से चला आ रहा चलन डराने वाला है। अपवाद को छोड दें तो चलन यह है कि पार्टी के संस्थापक पासवान परिवार के सदस्यों के अलावा किसी और को लगातार दो लोकसभा चुनाव लड़ने का अवसर अपवाद में ही मिला है। लेकिन ऐसा लग रहा है कि चिराग इस बार पार्टी का यह चलन तोड़ेंगे। मतलब कि कुछ सीटों पर पूर्व में लोकसभा सदस्य रह चुके नेता भी टिकट दुबारा पा सकेंगे। ऐसे में इस बार कुछ प्रत्याशी ऐसे है जिनके लिए उम्मीद की जा रही है कि उन्हे मौका मिल सकता है। इनमे अहम नाम है  खगड़िया लोकसभा क्षेत्र से दो बार चुनाव जीते चौधरी महबूब अली कैसर का। ये पार्टी चलन के लिए अपवाद हैं। इनके अलावा पासवान परिवार से अलग के जितने उम्मीदवार लोकसभा जीते, उन्हें दोबारा अवसर नहीं मिला। जबकि ये तीसरी बार अपनी उम्मीदवारी को लेकर उत्सुक हैं ।

लोक जनशक्ति पार्टी यानि लोजपा का गठन 2003 में हुआ था। 2004 का लोकसभा चुनाव पार्टी का पहला चुनाव था। इस पहले ही चुनाव में पार्टी ने चार लोकसभा सीटें जीती थी। हाजीपुर से पार्टी संस्थापक रामविलास पासवान, समस्तीपुर से उनके अनुज रामचंद्र पासवान, बलिया से सूरजभान और सहरसा से रंजीता रंजन की जीत हुई थी।  जबकि अगले ही चुनाव में पार्टी को बुरी तरह मात खानी पड़ी थी। 2009 के चुनाव में पार्टी आठ सीटों पर लड़ी। इन सभी सीटों पर उसकी हार हुई। 2004 के चुनाव में जीते लोजपा के दो सांसद सूरजभान और रंजीता रंजन लोजपा टिकट पर नहीं लड़ पाए। पार्टी संस्थापक रामविलास पासवान भी हाजीपुर से चुनाव हार गए थे। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में पूर्व में आरा से चुनाव हारे रामा सिंह को वैशाली से पार्टी ने टिकट दिया और वो चुनाव भी जीते।  लेकिन अगले ही चुनाव यानि 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हे दुबारा टिकट नहीं दिया।

2009 में लोजपा टिकट पर पूर्वी चंपारण से चुनाव लड़े और हारे प्रकाश झा,अररिया से जाकिर हुसैन खान , मुजफ्फरपुर से  भगवान लाल साहनी और नालंदा से सतीश कुमार दोबारा कहीं से लोजपा के उम्मीदवार नहीं बन पाए। 2014 के चुनाव में नालंदा से डॉ. सत्यानंद शर्मा लोजपा उम्मीदवार बन चुनाव मैदान में उतरे और हारे। 2019 में उन्हें भी टिकट नहीं मिला। अब जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। रालोजपा और लोजपा(रा) के रूप में दो हिस्सों में बँट चुकी पार्टी के पशुपति कुमार पारस की अगुआई वाले रालोजपा को करीब चार साल तक अपने साथ रखने के बाद एनडीए  ने गठबंधन से बाहर कर दिया है । अब एनडीए के साथ पार्टी का चिराग पासवान की अगुवाई वाला धड़ा आ गया है। ऐसे में पार्टी भले ही दो हिस्से में बँट गई लेकिन नेताओं को दुबारा टिकट न देने वाला चलन पार्टी में अभी भी रहेगा या टूटेगा इस पर सियासी लोगों की निगाहें हैं।  वैसे एनडीए ने चिराग की पार्टी को इस बार 5 सीटे दी है। इनमें तीन सुरक्षित हैं। जिनमें से एक पर चिराग स्वयं लड़ेंगे जबकि अन्य पर कोई और लड़ेगा। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि बाकी दो सुरक्षित सीटें जमुई और समस्तीपुर से परिवार का ही कोई सदस्य आता है या चिराग चलन तोड़ते हुए किसी को दुबारा प्रत्याशी बनाते है।

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