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‘आजादी’ जैसे ग्रह-नक्षत्र कराएंगे नई ‘आजादी’ का अहसास !

By Shakti Prakash Shrivastva on August 16, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

                  हम सभी जानते है और मानते भी हैं कि समय बलवान होता है। इतिहास इस बात का साक्षी रहा है कि समय चाहे प्रकृति के माध्यम से और चाहे ग्रह-नक्षत्रों के माध्यम से हमेशा शुभ-अशुभ का संकेत समाज को कराता रहा है। ज्योतिष गणना करने वाले मर्मज्ञों की माने तो आज से लगभग 76 वर्ष पहले जब हमारा देश भारत गुलामी की जंजीरों से मुक्त या ये कहें कि आजाद हुआ था उस समय ग्रह-नक्षत्रों की जो स्थिति थी आज इतने वर्षों बाद फिर वही स्थिति मौजूद रही। हमारा देश 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को 12 बजे आजाद हुआ था। उस समय भी सावन माह और मलमास की सुखद संयोग वाली युति थी। उस समय इस सुफल ग्रह-नक्षत्रों के संयोग ने हम भारतीयों को खुली और अपनी आजादी की हवा का एहसास कराया था। देश गुलाम देशों की श्रेणी से निकल आजाद हुआ। जिसके बाद हमने अपने जीने-रहने के लिए आवश्यक संविधान बनाया और आज उसी नियम-कानूनों के सहारे सफलता पूर्वक वैश्विक फलक पर अपनी अलग पहचान बना पाने में सफल रहे है।

ज्योतिषियों की माने तो भारत की जन्मकुंडली की मुताबिक 15 अगस्त 1947 को सावन के साथ मलमास की युति थी, कृष्णपक्ष की चतुर्दशी और पुष्य नक्षत्र का संयोग भी था, इस बार भी 15 अगस्त को आजादी काल यानि मध्यरात्रि को भी यही युति व संयोग रहा है। समय के ऐसे दुहराव पर यकीन करने वालों का मानना है कि उस समय देश की आजाद होने जैसी अहम घटना हुई थी और इस बार भी आने वाले समय में देशकाल के लिए कुछ नई आजादी सरीखे कुछ ऐतिहासिक घटनाक्रम घटित होगा। ज्योतिष के जानकार भी मानते हैं कि आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान उपस्थित हुआ ग्रह-नक्षत्रों का यह संयोग  देश की सुख-समृद्धि और मान-सम्मान बढ़ाने वाला होगा। ऐसा माना जा सकता है कि सन 2023 के 15 अगस्त की मध्यरात्रि मौजूद यह सुखद संयोग एक बार फिर सुखद इतिहास रचेगा। इस दिन 12 बजकर 43 मिनट तक   सावन महीने की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि थी। दिन में 1 बजकर 58 मिनट तक पुष्य नक्षत्र रहा। रात 1 बजकर 59 मिनट से सुबह 5 बजकर 32 मिनट तक सर्वसिद्धि योग रहा। इतना ही नहीं रात के 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त का होना शुभता काल का सबसे बड़ा प्रमाण है।

इस शुभ संयोग की व्याख्या करने वाले ज्योतिषियों का मानना है कि इस कालखंड में जहां यह दुर्लभ संयोग है वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग भी बना जो अद्भुत है। उनका यह भी मत है कि इस नक्षत्र पर किए गए सभी कार्य मंगलकारी सिद्ध होते हैं। चूंकि इस बार स्वतंत्रता दिवस पर मंगलवार की तिथि रही और इस समय मंगल सूर्य की सिंह राशि में हैं जिसका ज्योतिषीय मत है कि इससे पराक्रम में वृद्धि होती है। इतना ही नहीं सूर्य व चंद्रमा की कर्क राशि में युति भी रही, जो सम्मान-शांति में सहायक मानी जाती है। इस तरह कुल मिलाकर ग्रह -नक्षत्रों का कुछ ऐसा संयोग बना है कि आने वाले दिनों में शहर और देश का शौर्य, सुख, समृद्धि और सौभाग्य में बढ़ोतरी होगी। वहीं शुक्र ग्रह सिंह राशि में वक्री रहेंगें। ऐसी स्थिति में मान्यता ये है कि  सिंह, मेष व वृश्चिक राशि के जातकों का यश-वैभव बढ़ेगा।

कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि चूंकि हमारा देश-समाज धर्म आधारित रहा है लिहाजा स्वतंत्रता दिवस की तारीख और समय तय करते समय ज्योतिषीय कारकों को ध्यान में रखा गया था। 15 अगस्त 1947 को रात्रि 12:01 बजे आजादी की घोषणा का समय निर्धारित किया गया। चंद्रमा इस समय अत्यंत अनुकूल पुष्य नक्षत्र में था। सभी नक्षत्रों में पुष्य को राजा माना जाता है। आधी रात को अभिजीत मुहूर्त जो किसी भी बड़े प्रयास को शुरू करने के लिए उत्कृष्ट क्षण है, प्रभाव में था। उस समय, वृष लग्न का स्थिर चिन्ह जो राष्ट्र के लिए एक मजबूत नींव का प्रतीक है बढ़ रहा था। लगभग अधिकांशतः इसी तरह का कुछ संयोग इस साल भी स्वतंत्रता दिवस पर रहा। इसलिए ऐसे समीकरणों और गणनाओं पर विश्वास करें तो आने वाला दिन भारत के लिए शुभता लेकर आने वाला है। अलबत्ता गणनाएं यह भी संकेत दे रही है कि भारत की जन्मकुंडली में बन रही ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति आगामी कुछ दिनों-महीनों में राजनीतिक उथल-पुथल कराने वाली भी बन रही है।

 

 

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