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लालू के आते ही ‘तूफान’ बनेगा बवंडर

By Shakti Prakash Shrivastva on February 14, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

बिहार में कई बार बार मुख्यमंत्री रहे आरजेडी सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव सिंगापुर से स्वदेश वापस आ चुके हैं। किडनी ट्रांसप्लान्ट करा कर वापस दिल्ली पहुंचे लालू जल्द ही पटना जाएँगे। बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन की सरकार में गठबंधन सहयोगियों के बीच आपसी तनातनी से उठा सियासी तूफान लालू के आने पर थमने की उम्मीद की जा रही है। हालांकि कुछ सियासी जानकारों की मानें तो उनका कहना है कि तूफान थमने की बजाय उसके बवंडर का रूप लेने की संभावना अधिक है।

बिहार में सत्तासीन महागठबंधन की सरकार के सहयोगी दलों के बीच खींचतान इन दिनों चरम पर है। जेडीयू के कद्दावर नेता उपेंद्र कुशवाहा ने अपने ही नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नितीश कुमार की मुखालफत करते हुए श्री कुशवाहा कहते हैं कि नीतीश ने आरजेड़ी के तेजस्वी यादव को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर ठीक नहीं किया है। वो नितीश से आरजेड़ी और जेडीयू के बीच हुई डील का खुलासा करने की भी मांग कर रहे हैं। इस मसले पर नितीश और उनके सहयोगी जेडीयू नेता श्री कुशवाहा को पार्टी छोडने का सलाह भी दे चुके हैं। जबकि आरजेड़ी नेता तेजस्वी ने इस मामले को जेडीयू पार्टी का अंदरूनी मामला बताते हुए किनारा कर लिया है। पूर्व मंत्री और आरजेडी नेता डॉ सुधाकर सिंह द्वारा मुख्यमंत्री पर किए गए टिप्पणी पर पार्टी ने उनसे जवाब मांगा है जिसे डॉ सिंह ने दे भी दिया है। लेकिन अभी तक पार्टी की तरफ से उन पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गयी है। इसके अलावा महागठबंधन के एक और दल कांग्रेस ने भी सरकार में अपने कोटे से दो और मंत्री पद की मांग कर महागठबंधन की पेशानी पर बल ला दिया है। पहले कोटा बढ़ाने पर सीएम नितीश ने हामी भरी थी। लेकिन अब वो अपना पल्ला झाड रहे हैं। नितीश ने तेजस्वी पर मामला ट्रान्सफर कर दिया है। तेजस्वी ने साफ तौर पर सरकार का विस्तार करने से इन्कार कर दिया है। इस पर कांग्रेस और आरजेड़ी के बीच तल्खी बढ़ गयी है। सूबे की सियासत को समझने वालों का मानना है कि लालू यादव के पटना पहुँचने पर इनमें से अधिकांश मामला सुलझ जाएगा।  जहां तक नितीश के उत्तराधिकारी का प्रश्न है तो इस पर भी लालू कुछ न कुछ सोल्युशन दे ही देंगे। रही बात डॉ सुधाकर सिंह और उपेंद्र कुशवाहा की तो इन पर भी लालू यादव कुछ वाजिब हल बताएँगे। इस समय बिहार की सियासत को एक पारिवारिक कुनबे के ढांचे की जरूरत है। यदि इसी भाव से लालू यादव ने हल देने की कोशिश की तो निःसन्देह यह मामला ज़मींदोज़ हो जाएगा। वरना ये तूफान एक बवंडर का रूप अख़्तियार कर प्रदेश के भविष्य पर ग्रहण साबित होगा।

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