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GDA की कार्रवाई से हलकान खरीददार : पूंजी लगा दी मकान में, अब बेघर होने का खतरा

By Shakti Prakash Shrivastva on November 17, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव की आवाज में रिपोर्ट सुनने के लिए आडियो बटन पर क्लिक करें।

पूर्वाञ्चलनामा न्यूज, गोरखपुर। गोरखपुर महानगर के अनियोजित विकास पर लगाम लगाने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की तरफ से महानगर समेत बाहरी क्षेत्रों में ड्रोन से सर्वे कराया जा रहा है। इस सर्वे में अब तक कुल 26 कालोनियों को अवैध पाया गया है। इस बाबत संबंधितों को जीडीए की तरफ से नोटिस भी भेजी जा रही है। जीडीए के इस कार्रवाई से इन कालोनियों में अपने सपने का आशियाना बना कर रहने वालों में अफरातफरी मच गयी है। उनका मानना है कि जब जमीन खरीदी गयी, रजिस्ट्री हुई और मकान का निर्माण कार्य हुआ। तो कोई रोकने नही आया। न ही किसी ने अवैध बताया। अब हमें अवैध बताया जा रहा है। हमारी तो जीवन भर की पूंजी भी गयी, मकान भी जाएगा। ऐसे में अब हम परिवार लेकर जाएँ तो जाएँ कहाँ। हालांकि इन अनियोजित कालोनियों के भविष्य का निर्धारण महायोजना-2031 का स्वरूप तय होने के बाद ही होगा। महायोजना की मुताबिक भू उपयोग अनुकूल मिलने पर अनियोजित विकास को नियोजित करने का अवसर भी संबन्धित को मिलेगा। लेकिन ऐसा न होने की स्थिति में संबंधितों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। इस साल के अंत तक महायोजना का स्वरूप तय होने की संभावना है।

इस संबंध में आमजन सहित भूखंड की खरीद-फरोख्त करने वालों को जीडीए यानि गोरखपुर विकास प्राधिकरण द्वारा नियम कानून की जानकारी देते हुए सचेत भी किया जा रहा है। उनसे ऐसी कालोनियों में भूखंड न खरीदने की अपील भी की जा रही है। प्राधिकरण की मंशा है कि लोग अनियोजित रूप से विकसित हो रही कालोनियों में भूखंड न खरीदें। प्राधिकरण की कार्रवाई से भूखंड के खरीददारों सहित जमीन की प्लाटिंग करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। कई कारोबारियों ने तो अपने दफ्तर बंद कर दिये हैं। अवैध कालोनियों को चिह्नित करने के लिए जीडीए ड्रोन का सहारा ले रहा है। ड्रोन से फोटो के साथ ही वीडियो भी बनायी जा रही है। इस प्रक्रिया में कालोनियों का पूरा क्षेत्रफल, अब तक हुए निर्माण और खाली प्लाटों की पूरी रिपोर्ट तैयार की जा रही  है। इसके आधार पर कालोनियों की सूची जीडीए की वेबसाइट पर भी अपलोड की जाएगी।

प्राधिकरण के उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर की मुताबिक आम लोगों को आश्वस्त किया जा रहा है कि प्राधिकरण प्रशासन शहर के सुनियोजित विकास का पक्षधर है। इस बाबत जो भी चिन्हीकरण या सर्वे की कार्रवाई की जा रही है। उससे घबराने की बिल्कुल ही जरूरत नहीं है। यदि भू उपयोग सही है और कालोनाइजर जीडीए से अपना लेआउट पास करा लेते हैं तो उनकी कालोनियों को वैध किया जा सकता हैं। बिना मानचित्र स्वीकृत कराए किसी को अनियोजित विकास में सहयोगी नहीं बनने दिया जाएगा। प्राधिकरण की लगातार कोशिश है कि अनियोजित विकास करने वालों से खरीददार दूर रहें। वरना वो सपने दिखा कर जमीन बेच कर चले जाएंगे। बाद में अपने जीवन भर की पूंजी जमीन लगा मकान बनाने वाला बिना नाली-सड़क-पानी आदि के पूरे जीवन अवैध बनकर रहते हुए उसकी दुश्वारियाँ झेलने को मजबूर हो जाएगा। ऐसा हो भी रहा है कि शहर के बाहरी हिस्से में जमीन की प्लाटिंग कर बिल्डर अच्छे दामों में जमीने जरूरतमंदों को बेच रहे हैं और लोग नियम कानून की जानकारी के अभाव में खरीद भी रहे है। जब उन्हे जमीन के अवैध होने की जानकारी मिल रही है तो उनकी जमीन सरक जा रही है। उनकी परेशानी ये है कि जब जमीन खरीदी गयी, रजिस्ट्री हुई तब भी किसी ने उन्हें नहीं बताया। अब जब मकान बनवाकर रहना शुरू किया तो उसे अवैध बता कर उन्हे डराया जा रहा है। अब तो आशियाना बनाने में जीवन भर की उनकी पूंजी फंस गई है। बिल्डरों की तरफ से गोरखपुर-वाराणसी हाइवे पर बेलीपार से आगे तक प्लाटिंग कर उसे ऊंचे रेट पर बेचा जा रहा है। खरीददार अब परेशान हाल जीडीए के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। यही हालत शहर के बाहरी महराजगंज, सोनौली, देवरिया और लखनऊ की तरफ जाने वाली सड़कों पर भी है।

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