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हिन्दी दिवस पर विशेष : सिंधु घाटी की सभ्यता से कैसे संबंधित है ‘हिन्दी’

By Shakti Prakash Shrivastva on September 14, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

हमारे देश की राष्ट्र भाषा हिन्दी (Hindi) है। इसको देश-दुनिया में प्रोत्साहित करने लिए ही हर साल 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की एक भाषा का नाम दूसरी भाषा (Hindi) से लिया गया है। जी हाँ, मेरा मतलब ये कि हिन्दी (Hindi) भाषा का हिन्दी (Hindi) नाम फारसी भाषा से लिया गया है। जिसका अर्थ होता है सिंधु नदी की भूमि। हम सब देश की प्राचीनतम सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में शुरू से ही पढ़ते-सुनते आए हैं। सिंधु नदी के किनारे बसी सभ्यता होने की वजह से इसे ये नाम मिला। इसीलिए इस नदी के इर्द-गिर्द गुजर-बसर करने वालों को फारसियों ने हिन्दू नाम दिया और उनके द्वारा बोली जाने वाली भाषा को हिन्दी (Hindi) कहा। आज देश की आधी आबादी से अधिक हिन्दी (Hindi) बोलती है। आज हिन्दी (Hindi) देश की राजकीय भाषा है। देश ही नहीं देश के बाहर भी मारीशस, फ़िजी, गुयाना, त्रीनिदाद, नेपाल, टोबैको, सूरीनाम जैसे कई ऐसे देश हैं जहां करोड़ों-करोड़ की आबादी में हिन्दी (Hindi) बखूबी बोली और समझी जाती है। यही वजह है कि इसे देश में राष्ट्रभाषा ही नही मातृभाषा के तौर पर स्वीकार्यता मिली है। 14 सितंबर,1949 को देवनागरी लिपि हिंदी को भारत की राजभाषा के तौर पर स्वीकार किया गया था। संवैधानिक अधिकार के तहत 26 जनवरी 1950 को संविधान के अनुच्छेद 343 में इसे आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दी गई। अंग्रेजी को भी मान्यता मिली और देश के राज्यों को अपनी आधिकारिक भाषा को मान्यता देने की छूट दी गई। इतनी बड़ी आबादी द्वारा बोली जाने वाली इस भाषा का शुमार आज दुनिया में सर्वाधिक बोली जाने वाली तीसरी बड़ी भाषा के रूप में है। हिन्दी (Hindi) और क्षेत्रों में फैले इसके प्रोत्साहन के लिए ही हर साल 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस और 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिन्दी दिवस मनाया जाता है। इन दोनों ही आयोजनों का मूल उद्देश्य भाषा का प्रचार-प्रसार ही है। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने 14 सितंबर को हिंदी दिवस के तौर पर मनाने की पहली घोषणा संसद में की थी। इसके बाद देश में पहली बार आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया था।

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