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ज़मींदोज़ हुआ नोएडा का ट्विन टावर, कोर्ट के निर्णय में लगे 9 साल, गिरने में महज 9 सेकेंड

By Shakti Prakash Shrivastva on August 28, 2022
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पूर्वाञ्चलनामा न्यूज, नोएडा। सत्य हमेशा विजेता होता है भले ही उसे विजयी होने में समय लग जाये। नोएडा के सुपरटेक द्वारा बनाए गए कुतुबमीनार से भी ऊंचे बत्तीस मंजिले ट्विन टावर के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ। बिल्डर के मनमानापन से आजिज़ उसके महज चंद ग्राहकों ने विरोध किया और परिणाम स्वरूप रविवार की दोपहर कोर्ट के निर्देशानुसार टावर ज़मींदोज़ कर दी गयी। यहाँ चूंकि विरोध करने वालों का विरोध जायज था इसलिए उन्हें न्याय मिला। भले इस न्याय की आस में उन्हे 9 साल लग गए। 23 नवंबर,2004 को नोएडा प्रशासन ने सेक्टर-93ए के प्लाट नंबर 4 को सुपरटेक बिल्डर को एमराल्ड कोर्ट के लिए आवंटित किया। इसमें बिल्डर को ग्राउंड फ्लोर सहित 9 मंजिल के 14 टावर बनाने की इजाजत थी। लेकिन बिल्डर ने इस स्वीकृति संबंधी आदेश को कई बार गलत तरीके से संशोधित कराया। जब 2 मार्च, 2012 को बिल्डर ने टावर संख्या 16 और 17 के लिए पुनः संशोधन कराते हुए 121 मीटर ऊंचाई और 40 मंजिले  दो टावरों की स्वीकृति ली जिसमें दो टावरों के बीच की दूरी 16-18 मीटर की बजाय महज 8-9 मीटर निर्धारित की गयी। बिल्डर के मनमानापन से परेशान टावर रेजीडेंट वेल्फेयर एसोसिएशन के सदस्य यूबीएस तेवतिया, एसके शर्मा, रवि बजाज, वशिष्ठ शर्मा, गौरव देवनाथ, आरपी टंडन और अजय गोयल ने नोएडा प्रशासन से गुहार लगाई। वहाँ सुनवाई नही होने पर इन लोगों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने इनकी मांगों को जायज ठहराते हुए 2014 में टावरों को ध्वस्त करने का आदेश दे दिया। इस आदेश के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जहां कोर्ट ने अगस्त 2021 में टावरों को ध्वस्त किए जाने संबंधी आदेश पर अंतिम मुहर लगा दी। इसके लिए तीन महीने का समय भी निर्धारित किया लेकिन आदेश अनुपालन में बरती जा रही सावधानियों के चलते आदेश लागू करने में प्रशासन को एक साल का वक्त लग गया। वाटरफाल एक्सप्लोसन तकनीक के इस्तेमाल से ट्विन टावरों में एपेक्स टावर 32 और सियान टावर 29 मंजिले को ढहा दिया गया। इनमें कुल 915 फ्लैटों में से 633 फ्लैट बुक हो चुके थे। टावरों को गिराने के लिए खंभों में 7000 सुराख बनाए गए थे। इन्ही सूराखों में 3700 किलोग्राम विस्फोटक भर कर रिमोट से विस्फोट कराया गया। बटन आन करने के महज 9 सेकेंड में पूरी बिल्डिंग ध्वस्त हो गयी। इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजामात किए थे। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर आधे घंटे के लिए आवागमन रोका गया था। बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स, तकनीकी विशेषज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी ध्वसती कार्रवाई के दौरान मौजूद रहे। गनीमत है की सबकुछ सकुशल सम्पन्न हो गया। अगल-बगल के टावरों को भी पूर्वानुमान की मुताबिक कोई क्षति नही हुई। बगल के अपार्टमेंट की चहारदीवारी का मामूली हिस्सा क्षति ग्रस्त हुआ। लेकिन कोई बड़ी क्षति नहीं हो पायी। इसपर शासन-प्रशासन ने राहत की सांस ली। दोनों टावरों को गिराने में लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च हुआ। इसमें बिल्डर कंपनी सुपरटेक ने 5 करोड़ दिये और शेष 15 करोड़ मलबा बेच कर एकत्र किया जाएगा। मलबे के रूप में 55000 तन कचरा निकलने का अनुमान है। इन कचरों में 4000 तन स्टील होने का अनुमान है।

 

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