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वाह री कांग्रेस : आफिस किराया बकाया, चुकाने के लिए चंदे से जुटाई जा रही रकम

By Shakti Prakash Shrivastva on July 5, 2022
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पूर्वाञ्चल डेस्क/प्रयागराज

समय होत बलवान। सौ फीसद सच है क्योंकि यह जब साथ देता है तो रंक को राजा और दूर होता है तो राजा को रंक बना देता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है आज की कांग्रेस पार्टी। एक समय देश की सबसे बड़ी पार्टी, सर्वाधिक समय तक देश में शासन करने के साथ ही देश की आजादी में भी अहम किरदार निभाने वाली पार्टी इन दिनों दुर्दिन में है। पार्टी के खेवनहार कानूनी दांव-पेंच में उलझे हुए हैं। शीर्ष नेताओं में आपस का मतभेद चरम पर है। भारी भरकम दिखने  वाला संगठन, जमीनी धरातल पर जर्जर हो चुका है। सांगठनिक रूप से कमजोर हो चुकी पार्टी आर्थिक रूप से भी कमजोर हो चली है। प्रयागराज में स्थित पार्टी का ऐतिहासिक कार्यालय अपना माहवारी किराया समय से दे पाने की स्थिति में नहीं है। निगम का 6.12 लाख रुपये किराया बकाया है। किराया जमा करने के लिए कोर्ट ने पार्टी को 15 जुलाई तक का समय दिया गया है। किराया ही नहीं बकाया बिजली बिल अदा न करने पर कार्यालय की बिजली भी काटी जा चुकी है। सोमवार यानि 4 जुलाई को किराया चुकाने के लिए दफ्तर में एक आवश्यक बैठक में चर्चा की गई। इस बाबत धन संग्रह के लिए चंदा इकट्ठा किया गया। बैठक में मौजूद पार्टी की प्रदेश महासचिव मुकुंद तिवारी ने इस पर पर गंभीर चिंता जताई है। इस संदर्भ में राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने 50 हजार रुपये दिया तो कई नेताओं ने अपने-अपने क्षमता अनुसार चंदा देकर धनसंग्रह किया। इससे पहले प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से भी दो लाख रुपये का सहयोग दिया गया है। कुल मिलाकर अब तक 2.60 लाख रुपये का संग्रह किया जा चुका है। इस कार्यालय की ऐतिहासिकता को लेकर भी पार्टी संजीदा है, क्योंकि इसमें कभी पार्टी के दिग्गज नेताओं की बैठकें हुआ करती थीं। यहीं से पार्टी ने कई अहम फैसले लिए थे। कमला नेहरू, पं.जवाहर लाल नेहरू, पुरुषोत्तम दास टंडन, विश्वंभर नाथ पांडेय, मुजफ्फर हसन, इंदिरा गांधी भी शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं। शहर के व्यस्ततम इलाके चौक में वर्ष 1932 से शहर कमेटी का यह दफ्तर है। पं. जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी सरीखे देश के तीन-तीन प्रधानमंत्रियों ने इस कार्यालय में बैठकें की थीं। आजादी के आंदोलनों में भी इस कार्यालय का योगदान रहा है। पार्टी के पुराने जानकारों की मुताबिक इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी की पहली मुलाकात इसी दफ्तर में हुई थी। यहीं से उनके प्रेम-प्रसंगों की शुरुआत हुई। आज अफसोस इस बात का है कि देश के इतिहास में अहम किरदार निभाने वाले इस ऐतिहासिक कार्यालय का किराया अदा करने के लिए चंदे का सहारा लिया जा रहा है जबकि देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। हालांकि पार्टी के प्रदेश महासचिव मुकुंद तिवारी ने माना है कि जल्द से जल्द समस्या का निदान कर लिया जाएगा। इस संबंध की खबरों पर शहर कांग्रेस कमेटी,प्रयागराज के अध्यक्ष प्रदीप कुमार मिश्र ‘अंशुमन’ और अध्यक्ष,गंगापार सुरेश यादव ने संयुक्त वक्तव्य मीडिया मे जारी किया है। जिसमें 5 बिंदुओं मे प्रकरण के बारे में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि कार्यालय पर कानूनी विवाद है, किराया संबंधी विवाद है। बिजली का बिल जमा होने की जानकारी भी दी है।

 

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