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चिल्लूपार : चुनाव में निर्णायक भूमिका में ब्राह्मण!

By Shakti Prakash Shrivastva on February 28, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

          गोरखपुर जिले के दक्षिणाञ्चल में स्थित विधानसभा क्षेत्र चिल्लूपार का नाम देश ही नहीं दुनिया में बाहुबली पंडित हरिशंकर तिवारी की वजह से कभी सुर्खियों में रहा करता था। लेकिन समय के साथ-साथ बदलाव हुआ। क्षेत्र में नए समीकरणों ने पाँव पसारा। मौजूदा विधानसभा चुनाव की बात करें तो इस बार बीजेपी और सपा के बीच सीधी टक्कर है लेकिन कहीं कहीं बीएसपी लड़ाई को त्रिकोणीय बना दे रही है। इस क्षेत्र के पुराने आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि यहाँ बाहुबल के कमजोर पड़ने पर बीएसपी का उभार हुआ। मुख्य लड़ाई में बीएसपी ही रहती थी। बाकी अन्य दूसरे या तीसरे नंबर के लिए ज़ोर आजमाइश करते थे। लेकिन बदले परिवेश में इस बार आबादी के लिहाज से इलाके में दूसरे नंबर की कौम ब्राह्मण की भूमिका काफी अहम हो गई है। इनके मतों के बिखराव की वजह से लड़ाई काफी रोमांचक हो गयी है। ब्राह्मण मत जिस पार्टी की तरफ अधिक होगा विधायकी की संभावना उसी की सर्वाधिक होगी। इलाके के इतिहास पर नजर डाले तो एक दिलचस्प कहानी पता चलेगी। पहली बार जेल में रहते हुए चुनाव लड़कर जीत दर्ज कराने वाले बाहुबली पंडित हरिशंकर तिवारी सन 1985 से 2007 तक लगातार 22 वर्षों तक क्षेत्र के विधायक रहे। यह सिलसिला 2007 के विधानसभा चुनाव में टूटा। इसके बाद इलाके में बीएसपी का बोलबाला हो गया। क़दावर बाहुबली हरिशंकर राजनीति के नए खिलाड़ी राजेश त्रिपाठी से चुनाव हार गए। राजेश बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। हार की टीस बनी रही और हरिशंकर तिवारी 2012 के चुनाव में भी कूद पड़े, लेकिन जनता ने जीत का आशीर्वाद नहीं दिया। दोबारा राजेश त्रिपाठी विधायक बन गए। इस हार के बाद हरिशंकर ने राजनीति से संन्यास ले लिया। अब राजनीतिक विरासत उनके बेटे विनय शंकर तिवारी संभाल रहे हैं। विनय ने बसपा के टिकट पर चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से पहली बार 2017 में चुनाव लड़ा और जीतकर लखनऊ पहुंच गए। इस बार विनय शंकर तिवारी सपा और पूर्व विधायक राजेश त्रिपाठी भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। बसपा ने राजेंद्र सिंह पहलवान और कांग्रेस ने सोनिया शुक्ला को चुनाव मैदान में उतारा है। लिहाजा, ब्राह्मण व दलित बहुल सीट का मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
इलाके में कुल 4,29,058 कुल मतदाता हैं जिनमे
2,31,826 पुरुष और 1,97,228 महिलाहैं। इनमे भी
अनुसूचित जाति    1.15 लाख, ब्राह्मण    80 हजार, यादव    40 हजार, मुस्लिम    30 हजार, निषाद    25 हजार, मौर्य    20 हजार, वैश्य    25 हजार, क्षत्रिय    20 हजार, भूमिहार    20 हजार
और सैंथवार    22 हजार की संख्या में है। पिछले चुनाव यानि 2017 में बीएसपी के विनय शंकर तिवारी ने बीजेपी के राजेश त्रिपाठी को महज साढ़े तीन हजार मतों से हराया था। इस बार कांग्रेस से सोनिया शुक्ल समेत बीजेपी और सपा के प्रत्याशी भी ब्राह्मण है। ऐसे में ब्राह्मण मतों में विभाजन से इंकार नहीं किया जा सकता है। ये जिधर अधिक संख्या में जाएँगे उसका पलड़ा भारी रहेगा। इस बार 4 प्रमुख दलों मे से 3 पर ब्राह्मण प्रत्याशी होना ब्राह्मणो के मत विभाजन की गारंटी देता है। बीएसपी से विधायक रहे विनय शंकर तिवारी इस बार मैदान मे है। उन्हे बीजेपी प्रत्याशी राजेश त्रिपाठी द्वरा जोरदार चुनौती मिल रही। एंटी इंकमबेनसी के प्रभाव से एसपी को थोड़े कमजोर होने का फायदा सीधे तौर पर बीजेपी को मिलेगा। और यदि ऐसा हुआ तो क्षेत्र में बीजेपी के कमल को खिलने से कोई रोक नहीं सकेगा।

 

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