Responsive Menu
Add more content here...
October 8, 2026
ब्रेकिंग न्यूज

Sign in

Sign up

  • Home
  • पूर्वांचल न्यूज
  • गोरखपुर फर्टिलाइजर कारख़ाना : स्थानीय उद्योगों के लिए संजीवनी साबित होगा!

गोरखपुर फर्टिलाइजर कारख़ाना : स्थानीय उद्योगों के लिए संजीवनी साबित होगा!

By Shakti Prakash Shrivastva on December 5, 2021
0 630 Views

शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

                  नब्बे के दशक में एक घटना के चलते बंद पूर्वाञ्चल के सबसे बड़े गोरखपुर फर्टिलाइजर कारखाने की चिमनियाँ एक बार फिर आग उगलने को तैयार है। 7 दिसंबर को पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों इसका लोकार्पण होना है। नीम कोटेड यूरिया का उत्पादन करने वाली हिंदुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड के इस कारखाने के शुरू होने से न केवल इलाके के हजारों-हजार बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा बल्कि स्थानीय स्तर पर बोरा बनाने, केमिकल सहित अन्य सहयोगी आवश्यक सामग्रियों का उत्पादन करने वाली औद्योगिक इकाइयों के लिए यह कारख़ाना संजीवनी साबित होगा।

भारी उद्योग के नाम पर पूर्वी उत्तर प्रदेश में खासकर गोरखपुर में इकलौते कारखाने के रूप में फर्टिलाइजर कार्पोरेशन आफ इंडिया द्वारा 20 अप्रैल 1968 को फर्टिलाइजर कारखाने की शुरुआत की गयी थी। अमोनिया गैस रिसाव की एक घटना के बाद यह कारख़ाना 10 जून 1990 में बंद हो गया था। बाद के दिनों में कई बार कारखाने का पुनः संचलन सियासी सुर्खियां बनता रहा। एक बार एच डी देवेगौड़ा के प्रधानमंत्रित्व काल में यह मुद्दा काफी महत्वपूर्ण हुआ, चलाने के बाबत समितिया बनी और घोषणा भी हुईं। लेकिन समय के साथ घोषणाएँ अमली जामा नहीं पहन सकीं। गोरखपुर के सांसद और मौजूदा यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ लगातार सड़क से संसद तक इस मुद्दे को उठाते रहे और जब सूबे की कमान हाथ में आई तो इसे उन्होने साकार करने की ठान ली। परिणामतः 22 जुलाई 2016 को पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों इसका शिलान्यास हुआ और महज पाँच वर्षों में पुराने कारखाने की जगह एक नए कारखाने ने आकार ले लिया। लगभग 8 हजार करोड़ रुपये की लागत से बने इस कारखाने में प्रतिदिन 3850 टन नीम कोटेड यूरिया का उत्पादन होगा। कारख़ाना परिसर में लगे पाँच हजार नीम के पेड़ों से मिलने वाले नीम फली से तैयार अर्क से यूरिया पर नीम कोटिंग की जाएगी। इस कोटिंग से न केवल यूरिया की कालाबाजारी रुकेगी बल्कि शराब बनाने में इसके इस्तेमाल पर भी अंकुश लगेगा। इतनी बड़ी फैक्ट्री के लगने से क्षेत्र में कारखाने की प्रकृति और आवश्यकता के लिहाज से कई छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों के दिन बहुरेंगे। क्यूंकी उनके माल को स्थानीय बाजार मिल जाएगा। ऐसे में सर्वाधिक फायदा बोरा उद्योग को होगा। क्योंकि कारखाने को प्रतिमाह 30 लाख बोरे की आवश्यकता होगी। क्षेत्र में बोरे बनाने वाली यूं तो माडर्न लेमिनेटर्स, महाबीर जूट मिल जैसी कई इकाइयां है। अब कारखाने के शुरू हो जाने पर कई और औद्योगिक इकाइयां स्थापित होने की कतार में है। उद्यमी भोला जैसवाल ने बोरा बनाने की नई फैक्ट्री लगाई है। जनवरी से उत्पादन शुरू हो जाने की उम्मीद है। यहां प्रतिदिन 1.50 लाख बोरा बनेगा। इस तरह से कभी इलाके के औद्योगिक गलियारे का सिरमौर फर्टिलाइजर कारख़ाना एक बार फिर इलाके के विकास की नयी परिभाषा गढ़ने को तैयार है।

 

 

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *