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टेराकोटा : बाजार में मूर्तियों की बढ़ी डिमांड, चाइनीज प्रोडक्ट आऊट, विदेशों में भी डिमांड

By Shakti Prakash Shrivastva on October 30, 2021
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गोरखपुर, (संवाददाता)। कोरोना संकट से लगातार जूझ रहे बाजार इस दिवाली गुलजार होने लगे है। टेराकोटा कलाकृतियों का बाजार तो कुछ खासा ही गुलजार नजर आ रहा है। गोरखपुर और आस-पास के बाज़ारों में टेराकोटा कलाकृतियों की डिमांड बढ़ी है जबकि चाइनीज आकृतियों-झालरों आदि के बाजार में कमी आई है। इस इलाके में कम से कम पाँच सौ से भी अधिक टेराकोटा कलाकार ऐसे है जो दिन-रात बाजार के डिमांड के हिसाब से माल तैयार करने में लगे हुए हैं।

टेराकोटा कलाकृतियों की धूम इस बार प्रदेश से बाहर देश के अन्य हिस्सों के अलावा विदेशों तक में है। जापान और जर्मनी जैसे देश इसके सबसे बड़े ग्राहक साबित हो रहे है। क्योंकि यहाँ से इनके उत्पादों की डिमांड अधिक है। गोरखपुर महानगर से सटे उत्तर टेराकोटा कला के लिए मशहूर औरंगाबाद के साथ ही गुलरिहा, भरवलिया, अशरफपुर जैसे गाँव इन दिनों खासे गुलजार हैं। बड़ी तादाद में गुजरात के व्यापारी इन गांवों से टेराकोटा के प्रोडक्ट खरीद कर ले गए हैं। वहां से यह माल यूरोप, जर्मनी, फ्रांस जैसे देशों में भेजा जाना है। इसके अलावा महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात आदि राज्यों में इन कलाकृतियों की काफी डिमांड है। हालांकि मंहगाई के चलते कीमतों में उछाल है लेकिन खरीददारों में कोई कमी नहीं है। जैसे चौमुखी दिया : 200 से 300रुपया, कछुआ : 250 से 350रुपया, दरबान : 1800 से 2000रुपया, कछुआ दीपक : 300 से 350रुपया, झूमर : 250 से 350 रुपया, हाथी : 1800 से 2000 रुपया, घोड़ा : 1400 से 2000 रुपया, लालटेन : 950 से 1400 रुपया। इनके अलावा टेराकोटा के प्रोडक्ट 70 रुपए से लेकर 3500 रुपए तक के बाजार में उपलब्ध हैं। स्थानीय टेराकोटा कलाकार मोहनलाल प्रजापति की मुताबिक दिवाली पर्व के लिए इस बार टेराकोटा उत्पादों में झूमर, हाथी, घोड़ा, लालटेन और डिज़ाइनर दीया, स्टैंड दीपक के साथ कलश की डिमांड है। खरीददारी के लिए आस-पास के अन्य जिलों के लोग भी पंहुच रहे हैं। मगर उनकी मांग पूरी नहीं हो पा रही है। हालांकि दिवाली की जो तैयारी पहले से की गई थी, वह देश के विभिन्न राज्यों में भेज दी गई है।

 

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