नयी दिल्ली, (संवाददाता)। कोरोना की तीसरी लहर को लेकर चिंतित देशवासियों के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की सीरो सर्वे रिपोर्ट काफी हद तक राहत पहुंचाने वाली है। इस चौथे सीरो सर्वे के रिपोर्ट की मुताबिक देश के 67.6 फीसदी लोगों (करीब 86 करोड़) में कोरोना एंटीबॉडी बन चुकी है। इसका मतलब ये कि ये या तो संक्रमित होकर ठीक हो गए, या इनमें वैक्सीन से एंटीबॉडी बन गयी है। लेकिन अभी भी देश के लगभग 40 करोड़ लोग संक्रमण के खतरे में हैं।
ICMR की इस रिपोर्ट में एक राहत भरी बात और है कि लगाए जा रहे कयासों के विपरीत बच्चों में कोरोना की तीसरी लहर में संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत कम है। अतः ऐसे में स्कूल खोले जा सकते हैं। ICMR की तरफ से मंगलवार को सर्वे के आंकड़े जारी किए गए। आंकड़े के मुताबिक इस चौथे देशव्यापी सीरो सर्वे में 6 साल से ऊपर के 28,975 लोगों को शामिल किया गया था। इस साल जून और जुलाई में 21 राज्यों के 70 जिलों से नमूने लिए गए। हर जिले के 10 गांव या वार्ड से 40-40 लोगों का नमूना लिया गया। इसमें छह से नौ वर्ष के 2,892, 10-17 वर्ष के 5,799 और 18 वर्ष से ज्यादा के 20,284 लोग शामिल थे। इनमें से दो-तिहाई लोगों में एंटीबॉडी (सीरो प्रिवलेंस) की मौजूदगी मिली है। ICMR के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि जिन क्षेत्रों की कम आबादी में एंटीबॉडी बनी है, वहां तीसरी लहर का खतरा ज्यादा है। उनकी मुताबिक दो-तिहाई लोगों में एंटीबॉडी का मिलना इस बात की तसदीक करता है कि काफी हद तक सुरक्शित होने के बावजूद इस लड़ाई से समझौता नहीं किया जा सकता। यानि की अभी भी सख्ती से कोविड प्रोटोकाल का अनुपालन किया जाना चाहिए। कोविड-19 वैक्सीन की एक डोज लगवा चुके 81% और दोनों डोज ले चुके 89.9% में एंटीबॉडी की मौजूदगी मिली है। जबकि बिना वैक्सीन वाले 62.3% लोगों में ही एंटीबॉडी मिली है। सर्वे में शामिल देश के 7,252 स्वास्थ्यकर्मियों में 85.2% में भी एंटीबॉडी मिली है। जबकि 10 फीसदी स्वास्थ्यकर्मियों ने वैक्सीन ही नहीं लगवाई है। वहीं, 76.1% लोगों को वैक्सीन की पहली डोज और 13.4% को दोनों डोज दी जा चुकी है। डॉ. भार्गव की मुताबिक छोटे बच्चे वायरस को आसानी से हैंडल कर लेते हैं। उनके लंग्स में वह रिसेप्टर कम होते हैं जहां कोविड-19 वायरस हमला करता है। सीरो सर्वे में भी 6 से 9 साल तक के बच्चों में लगभग उतनी ही एंटीबॉडी मिली हैं, जितनी वयस्कों में है। यूरोप के कई देशों ने भी प्राइमरी स्कूल बंद नहीं किए थे। ऐसे में स्कूल खोलने पर विचार किया जा सकता है। स्कूल खोलने की शुरुआत प्राइमरी कक्षाओं से होनी चाहिए। इसके बाद ऊपर की कक्षाएं खुलनी चाहिए। लेकिन भार्गव ने कहा, स्कूल खोलने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षकों सहित सभी स्कूली कर्मचारी अवश्य वैक्सीनेटेड हों।