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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पहले शंकराचार्य अब नहीं, आखिर क्यों ?

By Shakti Prakash Shrivastva on January 22, 2026
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                     शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

प्रयागराज माघमेला में हुए एक विवाद ने ऐसा रूप ले लिया है कि मौनी अमावस्या के पहले तक शंकराचार्य कहलाने वाले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से अब शंकराचार्य होने का दस्तावेज मांगा जा रहा है। दस्तावेज मांग रहा है प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण और अचंभित हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद। जबकि स्वामी के वकील ने इसे सुप्रीम कोर्ट का अवमानना माना है। स्वामी आश्चर्यचकित हैं कि शासन-प्रशासन मुझे शंकराचार्य मानता था लेकिन अब शंकराचार्य होने का प्रमाण मांग रहा है।  आखिर क्यों ?

दरअसल हुआ ये कि मौनी अमावस्या के दिन लावलश्कर समेत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद स्नान के संगम जा रहे थे। रास्ते में प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हे रथ से उतरकर पैदल जाने को कहा। उस पर विवाद उत्पन्न हो गया। पुलिस-प्रशासन और स्वामी के शिष्यों में नोनक-झोंक हुई। स्थिति से नाराज स्वामी न नहाने का संकल्प ले वहीं अनशन पर बैठ गए। विवाद के चंद रोज बाद ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मेल प्रशासन ने एक नोटिस भेजा। नोटिस के रिसीव न करने पर शिविर पर उसे चस्पा कर दिया गया। इस औपचारिक नोटिस के जरिए स्वामी से उनके शंकराचार्य पद के दावे पर स्पष्टीकरण मांगा है।  प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित सिविल अपील संख्या 3010/2020 और 3011/2020 का हवाला देते हुए कहा है कि अदालत ने अक्टूबर 2022 में ज्योतिष्पीठ के किसी भी नए पट्टाभिषेक पर रोक लगा दी थी।

इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने जहां मेला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए वहीं उनकी तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन मिश्रा ने कहा कि प्रशासन जिस 14 अक्टूबर 2922 के आदेश कहवाला दे रहा है उसके पहले 21 सितंबर का एक आदेश है जिसके आर्डर में कोर्ट द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य बताया गया था। स्वामी जी का पट्टाभिशेक इसके पहले ही हो चुका था। लिहाजा प्रशासन द्वारा भेजा गया नोटिस सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की श्रेणी में आता है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की मुताबिक जो शासन आज मुझसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांग रहा है वही पिछले साल महाकुंभ में छपी सरकारी स्मारिका में मेरा परिचय शंकराचार्य के रूप में किया गया था। उन्होंने मेला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वो भेदभाव कर रहा है। मेला क्षेत्र में ही कई लोगों को शंकराचार्य बताकर उन्हे शिविर आवंटित किया गया है। लेकिन उनसे कोई पूछताछ नहीं हो रही है। मुझे सिर्फ गौरक्षा की बात करने पर नोटिस तहमा दी गई है। उन्होंने कहा कि पिछले साल महाकुंभ में छपे एक सरकारी स्मारिका में मेरी फ़ोटो जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के नाम से प्रकाशित की गई थी। इन्ही सब तथ्यों को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपना पक्ष मीडिया से साझा किया और यह प्रश्न रखा कि कल तक शंकराचार्य कहलाने वाला संत अचानक गलत या फर्जी शंकराचार्य कैसे हो गया। बहरहाल इसमें सही-गलत जो कुछ भी हुआ लेकिन कहीं न कही किसी साजिश की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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