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भ्रष्टाचार पर चला योगी चाबुक !

By Shakti Prakash Shrivastva on September 4, 2025
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

पूरे उत्तर प्रदेश में आकंठ भ्रष्टाचार में लिप्त विभागों की यदि सूची बनाई जाए तो उसमें एक विभाग रजिस्ट्रार, फर्मस, सोसाइटीज एंव चिटस अवश्य होगा। इस विभाग के बारे में ऐसी टिप्पणी करने के पीछे मकसद विभाग की छवि धूमिल करना कत्तई नहीं है। बल्कि यह बताना है कि इस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते न केवल अपराध की स्थिति उत्पन्न हो जाती है बल्कि माननीय न्यायालयों का भी अमूल्यवान समय जाया होता है। लेकिन समय-समय पर ऐतिहासिक जनहितकारी फैसले लेने के लिए चर्चित प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार जो भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस की नीति रखती है की निगाहें इस पर टिक गई है। सरकार ने यह फैसला लिया है कि राज्य में सोसाइटी और ट्रस्टों के संचालन से जुड़े गड़बड़झालों और विवादों को रोकने के लिए वो नया सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम लागू करेगी। सरकार के इस फैसले से न सिर्फ फर्जी और निष्क्रिय संस्थाओं पर रोक लगेगी, बल्कि संपत्ति प्रबंधन, पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। संस्थाओं में हो रहे विवादों से छुटकारा मिलेगा सो अलग।
बीते पहली सितंबर को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्तमंत्री सुरेश खन्ना की मौजूदगी में सक्षम अधिकारियों के साथ एक बैठक की। बैठक में इस अधिनियम के बाबत तैयार मसौदे पर चर्चा की गई। प्रदेश में प्रभावी सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1860 में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा विवाद निस्तारण से जुड़े प्रावधानों की कमी होने के नाते सरकार का मानना है कि अब उत्तर प्रदेश को आज के संदर्भ में एक नये व्यावहारिक कानून की आवश्यकता है। इस कानून के प्रभावी होने पर संस्थाओं का सुचारु व निर्विवादित संचालन सुनिश्चित हो सकेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि चंद लोगों की कुत्सित मानसिकता के चलते ट्रस्ट और सोसाइटी की संपत्तियों की मनमानी बिक्री नहीं होनी चाहिए। इसके लिए ठोस प्रावधान किए जाएं। उन्होंने माना कि संस्थाओं के संचालन का अधिकार विपरीत परिस्थितियों में भी उसके प्रबंध समिति के पास ही होना चाहिए। शासन-प्रशासन का संस्थाओं के अंदर न्यूनतम हस्तक्षेप होना चाहिए। प्रशासक नियुक्त करने की व्यवस्था भी उचित नहीं है। प्रदेश में कुल आठ लाख से अधिक संस्थाएं पंजीकृत हैं। इनमें अधिकतर शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक समरसता, ग्रामीण विकास आदि क्षेत्रों में सक्रिय हैं। न्यायालयों में एक अच्छी खासी संख्या इनसे जुड़े विवादों की है। इसके अलावा ग्रामीनांचल में होने वाले अपराधों में भी इनसे जुड़ी अपराधों की संख्या ठीक-ठाक है।

मुख्यमंत्री योगी ने निर्देशित किया कि पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन, केवाईसी आधारित और निर्धारित समय वाली होनी चाहिए। इसके वित्तीय लेन-देन की जवाबदेही और लेखा-परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि नया अधिनियम इस तरह तैयार किया जाए कि प्रदेश की पंजीकृत संस्थाएं समाजोपयोगी कार्यों को और प्रभावी तरीके से कर सकें। साथ ही, पारदर्शिता और सुशासन की भावना को आगे बढ़ा सकें। इस कानून के लागू हो जाने से न केवल व्यवस्थाएं पारदर्शी और जनहितकारी हो सकेंगी बल्कि विवादों की संभावनाओं पर भी अंकुश लग सकेगा।

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