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June 20, 2026
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बैकफुट पर होंगे ट्रम्प !

By Shakti Prakash Shrivastva on August 10, 2025
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                                                                                   शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

भारत के विरोध में लगातार चाल पर चाल चल रहे अमेरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प को अब बैकफुट पर आना होगा। क्योंकि भारत ने यह तय कर लिया है कि वो ट्रम्प के दबाव में नहीं आएगा। ट्रम्प के दबाव के चलते वो अपने संबंध रूस से खराब नहीं करेगा। इधर ट्रम्प ने भारत के खिलाफ टैरिफ दोगुना करने की घोषणा की उधर भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रूस के दौरे पर चले गए। और तो और अमेरिका के इस रुख पर चीन ने भी भारत के साथ रहने का ऐलान कर दिया है।

जैसे अमेरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर पच्चीस फीसद टैरिफ लगाने और रूस के साथ व्यापार करने पर अतिरिक्त जुर्माना लगाने की धमकी दी भारत ने उसकी धमकियों को कोई तवज्जो नहीं दी। अलबत्ता रूसी राजनयिकों से बात करने के लिए देश के सुरक्षा सलाहकार अजीत दोभाल को रूस रवाना कर दिया। ट्रम्प को ये बात और नागवार लगी उसने दबाव और बढ़ाने के लिए सात अगस्त से प्रभावी होने वाले टैरिफ को पच्चीस से बढ़ाकर पचास फीसद करने की घोषणा कर दी। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप की टैरिफ धमकियों को खास तवज्जो देने की बजाय देशवासियों से स्थानीय उत्पाद खरीदने और ‘मेक इन इंडिया’ को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। इतना ही नहीं ट्रंप की धमकी के बावजूद मोदी सरकार ने रूस से कच्चे तेल की खरीद नहीं रोकी।
रूसी समुद्री कच्चे तेल के निर्यात का एक बड़ा खरीदार है भारत। इतना ही नहीं भारत के रवैये से बौखलाए अमेरीकी  राष्ट्रपति ट्रम्प को उस समय और तगड़ा झटका लगा जब चीन ने भी भारत के इस फैसले का समर्थन कर दिया। बरसों बाद चीन ने भारतीय विदेश नीति को स्वतंत्र बताते हुए जमकर तारीफ की है। चीन के इस दांव से अमेरिका को जोर का झटका लगा है। ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ समय पहले तक भारत और चीन में प्रतिद्वंद्विता साफ नजर आ रही थी। हालांकि, अब स्थिति में बदलाव आ रहा है। चीन और भारत के बीच रिश्ता धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है। ट्रंप का दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर प्रभाव सीमित है क्योंकि बीजिंग के पास अभी रेयर अर्थ मैग्नेट का नियंत्रण है। यह अमेरिका के हाई-टेक विनिर्माण के लिए आवश्यक है।

दोनों देशों ने इस साल की शुरुआत में एक-दूसरे के उत्पादों पर 100 फीसदी से अधिक टैरिफ बढ़ा दिया था। हालांकि, जल्द ही चीन के तल्ख तेवर के देखते हुए ट्रंप ने बैकफुट पर लौटकर स्थिति को संभालने की कोशिश की। अब ट्रंप ने भारत पर दबाव बनाने का दांव चला, हालांकि, यहां भी उनकी रणनीति कामयाब होती नहीं दिख रही।

रूस, चीन और भारत की तिकड़ी ने जिस तरह से अमेरीकी राष्ट्रपति के दांव को ज्यादा तवज्जो नहीं दी, ये ट्रंप के लिए तगड़े झटके से कम नहीं है। पहले ट्रंप ने चीन को टैरिफ दांव से धमकाने की कोशिश की। हालांकि, कामयाबी नहीं मिली। फिर अमेरीकी राष्ट्रपति ने पुतिन पर यूक्रेन के साथ युद्धविराम का दबाव डाला। वहां भी दाल नहीं गल सकी। अब उन्होंने भारत पर टैरिफ और जुर्माने के दबाव की रणनीति अपनाई। यहां भी उन्हें झटका लगा।
ऐसे में अमेरिका के पास बैकफुट पर होने के अलावा कोई खास विकल्प मौजूद नहीं है। देखना है कि अब अमेरिका क्या रुख अख्तियार करता है।

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