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June 20, 2026
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ऐसे हारी आम आदमी पार्टी !

By Shakti Prakash Shrivastva on February 8, 2025
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                                                                                                   शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

यह सुनते ही आपका चौंकना लाजिमी है। क्योंकि दिल्ली विधानसभा चुनाव का परिणाम 8 फरवरी को आना है। ऐसे में परिणाम के लिए निर्धारित तिथि से पहले भला आम आदमी पार्टी की हार कैसे हो गई। मतलब परिणाम कैसे आ गया। बिल्कुल सही है आपका चौंकना, लेकिन मैं बता दूँ कि यह सच है कि चुनाव परिणाम अभी नहीं आया है। वो अपने नियत तिथि को ही आएगा। यानि 8 फरवरी को ही। परिणाम जैसी सूचना देने का मेरा आधार एकजिट पोल है। मतदान समाप्त होने के बाद से ही एकजिट पोल के नतीजे आने शुरू हो गए। अधिकांश एकजिट पोल्स में आम आदमी पार्टी के हारने और लंबे अरसे से सत्ता से दूर रहे बीजेपी की वापसी के संकेत मिल रहे है।

सत्ताईस साल से बीजेपी और पंद्रह साल से कांग्रेस जैसी पार्टी दिल्ली की सत्ता से बाहर है। दस साल से यहाँ की सत्ता पर आम आदमी पार्टी का शासन है। ऐसे में एकजिट पोल के आभासी नतीजों को ही एक बारके लिए अगर अंतिम नतीजा मान लिया जाए तो यह प्रश्न उठता है कि आखिर एक दशक से बहुमत की सरकार चलाने वाले केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की यह हालत किसने और क्यों बनाई। इस बाबत सियासी गलियारों में तैर रही सूचनाओं पर यकीन करे तो यहाँ कांग्रेस भले ही अपने लिए एक भी सीट नहीं जीत सकी लेकिन उसने केजरिवाल की आप पार्टी की लुटिया डुबाने का पुख्ता इंतजाम जरूर कर दिया। पार्टियों को मिल रहे वोट प्रतिशत के आँकड़े इसका मजबूत प्रमाण है।

दिल्ली में हुए पिछले चुनाव यानि 2020 के चुनाव में आम आदमी पार्टी को 53.8 फीसदी वोट मिले थे। जबकि इस बार मैटराइज के एग्जि‍ट पोल में आम आदमी पार्टी को 44% वोट मिलता नजर आ रहा है। पिछले चुनाव में 38.5 फीसदी पाने वाली बीजेपी को 46% वोट मिलने का अनुमान है। तब कांग्रेस को सिर्फ 4.23 फीसदी वोट मिले थे जबकि इसबार के एग्जि‍ट पोल में उसे 08% मिलता हुआ दिखाया गया है। इन आंकड़ों से एक बात तो साफ है कि बीजेपी का वोट 8% प्रतिशत तक बढ़ा है जबकि कांग्रेस का वोट 4% बढ़ गया है। वहीं आम आदमी पार्टी का वोटिंग प्रतिशत का ग्राफ 53.8 फीसदी से घटकर 44% पर हो गया है। यानी उसका वोट प्रतिशत 10% वोट घट गया है।

हालांकि मतदान से महज चंद रोज पहले आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि बीजेपी 10 फीसदी वोट इवीएम के सहारे मैनेज करने में लगी है। इसलिए हमें 15 फीसदी ज्‍यादा वोट लेना होगा। आंकड़े इस बात की तसदीक भी कर रहे हैं कि अरविंद केजरीवाल का वोट बीजेपी और कांग्रेस के बीच बंट गया है। कांग्रेस ने अपना वोट बैंक जहां दोगुना कर लिया है वहीं बीजेपी अब ज्‍यादा वोट शेयर प्राप्त कर सकती है।  ऐसे में अधिकतर एजेंसियों के एकजिट पोल में बीजेपी की गद्दी पर ताजपोशी होते दिख रही है। ऐसा हुआ तो 8 फरवरी को दिल्ली कमल यानि बीजेपी के हवाले हो जाएगी।

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