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April 18, 2026
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बिहार में कांग्रेस का तेजस्वी दाँव !

By Shakti Prakash Shrivastva on April 9, 2025
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                                                                                         शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे प्रदेशों में जहां कभी कांग्रेस का बोलबाला हुआ करता था। कई-कई बार काँग्रेस की सरकारें थी। लेकिन पिछले कुछ दशकों से कांग्रेस की हालत इन प्रदेशों में खासी पतली हो गई है। वजह जो भी हो लेकिन आज कांग्रेस को राष्ट्रीय पार्टी होने के बावजूद इलाकाई स्तर पर अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए क्षेत्रीय पार्टियों का सहारा लेना पड़ रहा है। बिहार को ही लें। यहाँ पहले नितीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल सरीखे क्षेत्रीय दलों का सहारा लिया  लेकिन नितीश कुमार के पालाबदल के चलते अब ऊसे राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव के ही कंधे का सहारा रह गया है। प्रदेश की सियासत से मिल रहे संकेत के आधार पर यह माना जा रहा है कि इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जनता दल यूनाइटेड की अगुवाई में ही उतरेगी।

बिहार की सियासत में पिछले दिनों इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि विपक्ष दलों के आई एन डी आई ए गठबंधन में बहुत कुछ ठीक नहीं चल रहा है। गठबंधन के महत्वपूर्ण घटक दलों में निजी हितों के चलते जबरदस्त मतभेद है। लेकिन बिहार के कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार ने गठबंधन के दलों मे आपसी मतभेद की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। राजेश कुमार की मुताबिक बिहार में गठबंधन के सभी घटक दल मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे। पिछले दिनों प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालने के बाद राजेश कुमार ने बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव के साथ मुलाकात की। मुलाकात के समय उनके साथ कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान भी थे। मुलाकात के बाद गठबंधन सहयोगियों के साथ आगामी कार्ययोजना का खुलासा करते हुए उन्होंने कहा कि अपने गठबंधन के सहयोगी दलों के नेताओं के साथ अब नियमित बैठकें की जाएंगी। बिहार में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दौरे के बाद उभरे सियासी तस्वीर से ऐसा लग रहा है कि शेष बचे दल अपनी एकजुटता को लेकर खासे चिंतित हैं। यही वजह है कि कांग्रेस ने अपनी सियासी जमीनी का आकलन करने के बाद यह तय किया है कि प्रदेश में प्रभावी क्षेत्रीय दल राष्ट्रीय जनता दल को ही अगुवाई की कमान दी जाए। इसके लिए पार्टी ने उत्तर प्रदेश के फार्मूले को अपनाया जिसमें उत्तर प्रदेश के प्रभावी विपक्षी दल समाजवादी पार्टी को गठबंधन की सियासत का नेतृत्व सौंपा था। इसका फायदा भी ऊसे लोकसभा चुनाव में साफ-साफ दिखा। एक-एक विधायक के लिए तरस रही पार्टी के आधा दर्जन के लगभग सांसद चुने गए।

काँग्रेस ने बेहद संजीदगी से बिहार में अपने सियासी पाँव पुनः जमाने के लिए तेजस्वी यादव को आगे करने का फैसला लिया है। चुनाव में विपक्षी गठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर काँग्रेस नेता शकील ने कहा कि तेजस्वी यादव विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं। वह सभी विपक्षी दलों का प्रतिनिधित्व करते हैं और गठबंधन के सभी घटकों के समर्थन से विधानसभा के बाहर भी ऐसा करना जारी रखेंगे।

इस वर्ष होने वाले बिहार विधानसभा के चुनाव परिणाम से यह साबित हो जाएगा कि कांग्रेस का यह तेजस्वी दाँव कितना मुफीद साबित हुआ।

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