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फिर जीते योगी !

By Shakti Prakash Shrivastva on October 8, 2024
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

लोकसभा चुनाव के बाद जिस तरह यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बीजेपी के अंदर माहौल बना था। उसे देख ऐसा लगने लगा था कि अब योगी की उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से विदाई तय है। लेकिन हुआ उल्टा, विदाई की जगह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सहयोग से योगी अपने भीतरघाती पार्टी नेताओं की साजिश से विजयी होकर पहले की अपेक्षा और मजबूती से उभरे। योगी के इस विजय का पार्टी के भीतर और बाहर दोनों ही जगह जमकर तारीफ हुई। अब जबकि यूपी में विधानसभा की 10 सीटों के लिए उप चुनाव होने है। पार्टी ने जिस तरह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व को स्वीकारते हुए उम्मीदवारों के नाम चयन में उन्हे आगे किया है उससे लगता है कि योगी पार्टी के भीतर खाने अपने विरोधियों से एकबार फिर जीत गए हैं।

उत्तर प्रदेश के करहल, सीसामऊ, मिल्कीपुर, कटेहरी, कुंदरकी, खैर, गाजियाबाद, फूलपुर, मँझवा और मीरापुर विधानसभा सीट के लिए जल्द ही उपचुनाव होने हैं। अभी तक इन दस विधानसभाओं में से पाँच पर समाजवादी पार्टी, तीन पर बीजेपी, एक पर बीजेपी के सहयोगी निषाद पार्टी और एक पर उसकी दूसरी सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल का कब्जा था। अब जबकि निर्वाचन आयोग किसी भी समय इन चुनाव के तारीखों का ऐलान कर सकता है। इस बार बीजेपी सौ प्रतिशत यानि दसों पर सीटों पर जीत का दावा कर रही है। पार्टी इन चुनावों में क्लीनस्वीप करने के मूड है। ऐसा कर वो अपने मुख्य प्रतिद्वंदी समाजवादी पार्टी से लोकसभा चुनाव में हुए पिछड़ेपन का बदला लेना चाहती है। इसलिए उपचुनावों में बीजेपी अपनी चुनावी तैयारियों में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है। इसीलिए लोकसभा चुनाव में हुए टिकट बंटवारे से नाराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस बार पार्टी विश्वास में लेकर पुचकार कर अपना हित साधना चाहती है। इस क्रम में 7 अक्टूबर दिन सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में लखनऊ में हुई  बैठक में हर विधानसभा पर 3-3 उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर लिए गए हैं।
इस उपचुनाव के होने की वजह है विधायकों का सांसद चुना जाना या  किन्ही कारणवश विधायक की सदस्यता निरस्त होना। जैसे कि दस में नौ विधानसभा सीटें करहल, सीसामऊ, मिल्कीपुर, कटेहरी, कुंदरकी, खैर, गाजियाबाद, फूलपुर, मँझवा और मीरापुर विधानसभा ऐसी हैं जहां के विधायक बीते लोकसभा चुनाव में सांसद चुन लिए गए हैं जबकि कानपुर सीसामऊ के  विधायक को न्यायालय द्वारा सजा मिलने की वजह से उनकी सीट रिक्त हो गई थी। इनमें करहल, सीसामऊ, मिल्कीपुर, कटेहरी और कुंदरकी में सपा के विधायक थे जबकि खैर, गाजियाबाद और फूलपुर पर बीजेपी का कब्जा था। मझवा में बीजेपी के सहयोगी निषाद पार्टी के विधायक थे जबकि मीरापुर से बीजेपी के ही सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल के हिस्से में थी।

पिछले लोकसभा चुनाव के लिए हुए टिकट बंटवारे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को साइडलाईंन किया था नतीजा अपेक्षित सीटे प्रदेश में नहीं मिली थी। इसके बाद प्रदेश के उपमुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बैठकों तक में जाना छोड दिया था। विधायक फतेह बहादुर सिंह, राज्यमंत्री दिनेश खटिक, एम एल सी देवेन्द्र प्रताप सिंह सरीखे कद्दावर भाजपाइयों के व्यवहार में परिवर्तन दिखने लगा था। सियासी गलियारों में माना गया कि ये सब बीजेपी आलाकमान के इशारे पर हो रहा है। लेकिन परिस्थितियाँ बदली पार्टी आलाकमान ने स्थितियों का विश्लेषण करने पर पाया कि ऐसे तो पार्टी का नुकसान हो जाएगा। लिहाजा अचानक सबके सुर और व्यवहार बदल गए और योगी पहले की अपेक्षा और मजबूत बनकर स्थापित हो गए। हालांकि लोकसभा में मिली अपेक्षित हार की वजह योगी आदित्यनाथ ने पार्टी आलाकमान को बता दिया था। उन्होंने कहा था कि ऐसा गलत टिकट वितरण की वजह से हुआ है। अब पार्टी आलाकमान पुरानी गलतियों को दूर करते हुए उपचुनाव के प्रत्याशी चयन में योगी आदित्यनाथ को आगे किया है। इस बाबत हुई पार्टी की अहम बैठक भी मुख्यमंत्री आवास पर ही आयोजित की गई। बीजेपी कोर कमेटी के सदस्यों में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक समेत यूपी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह भी मौजूद थे। बैठक में उपचुनाव के लिए तीन-तीन नामों का पैनल तैयार कर लिया है। बताया जा रहा है कि अब इन नामों को बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व के पास भेजा जाएगा। बीजेपी नेतृत्व इन तीन नामों में से किसी एक नाम पर मुहर लगाएगा। इस बैठक में योगी आदित्यनाथ की अहम भूमिका में रखा जाना ही उनकी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

 

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