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कांग्रेस का ‘ब्राह्मण’ कलह : जितिन के बाद ललितेश ने भी कहा पार्टी को गुडबाय

By Shakti Prakash Shrivastva on September 24, 2021
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

उत्तर प्रदेश में कई दशकों तक ठसके के साथ राज करने वाली कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक ग्लैमर का ग्राफ इतना नीचे पहुँच जाएगा किसी ने सोचा तक नही था। महज दो-तीन दशक प्रदेश की सत्ता से बाहर रहने से आज कांग्रेस की हालत ख़ासी कमजोर हो गयी है। हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में लगभग आधा दर्जन सीटों तक सिमटी कांग्रेस पार्टी इस बार प्रियंका फैक्टर के तहत बूथ प्रबंधन के नए प्रयोगों के भरोसे सरकार बनाने का दावा कर रही है। जबकि जमीनी सच्चाई ये है कि बूथ स्तर की मजबूती कौन कहे पार्टी के कई पीढ़ियों से चले आ रहे रिश्ते भी आज साथ छोड़ते जा रहे हैं। जहां प्रदेश का समूचा विपक्ष सत्ता से नाराज चल रहे ब्राह्मणों को रिझाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है वहीं कांग्रेस में दशकों पुराने रिश्ते वाले कद्दावर ब्राह्मण परिवार के जितिन प्रसाद और ललितेश पति त्रिपाठी सरीखे प्रतिनिधि पार्टी को गुडबाय बोल रहे हैं।

कांग्रेस की हालत ये हो गयी है कि कभी पार्टी की मजबूती मानी जाने वाला गांधी परिवार भी आज पार्टी में बढ़ते अंतर्कलह को रोक नहीं पा रहा है। चाहे गुलाम नबी आज़ाद, आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल सरीखे 23 कद्दावर नेताओं द्वारा पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े करने का मामला हो या ज्योतिरादित्य सिंधिया का पार्टी छोड़ने का या फिर राजस्थान में सचिन पायलट की गुर्राहट हो। ये मामले ये साबित करने के लिए काफी हैं कि पार्टी हाई कमान कहीं न कहीं या तो अनुभवहीनता के चलते मसले हल नहीं कर पा रहा है या अवसर विशेष का इंतजार कर रहा है। हालांकि राजनीति में कुछ मौके ऐसे होते है जहां समय पर निर्णय न होना घातक सिद्ध हो सकता है। 2022 में बहरहाल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने है। लिहाजा यहाँ की बात करें जहां ब्राह्मणों का एक बड़ा तबका मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ब्राह्मण विरोधी करार कर चुका है। चुनाव में ब्राह्मण जाति विशेष के प्रभाव को देखते हुए उन्हे रिझाने के लिए समाजवादी पार्टी जहां जगह-जगह भगवान परशुराम की प्रतिमा लगाने की बात कर रही है और बहुजन समाज पार्टी प्रदेश व्यापी ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन कर रही है। वहीं कांग्रेस जैसी पार्टी में न थमने वाले अंदरूनी कलह का आलम ये है कि पूर्वाञ्चल के कमलापति त्रिपाठी और पश्चिमी क्षेत्र के जितेंद्र प्रसाद जैसे कद्दावर ब्राह्मण नेता के नयी पीढ़ी का पार्टी से मोहभंग कर दिया है। पहले जितेंद्र प्रसाद के पुत्र पूर्व सांसद जितिन प्रसाद ने पार्टी छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया है। वही बनारस के रसूखदार ब्राह्मण परिवार के  कद्दावर कांग्रेसी नेता पंडित कमलापति त्रिपाठी के प्रपौत्र ललितेश पति त्रिपाठी ने भी परिवार की कांग्रेसी निष्ठा को भुलाते हुए पार्टी को अलविदा कह दिया है। प्रदेश के ऊर्जांचल की राजनीति पर तीन दशकों से नजदीकी परख रखने वाले ओबरा के वरिष्ठ पत्रकार राहुल श्रीवास्तव का मानना है कि ललितेश का परिवार कई दशकों से खाँटी कांग्रेसी रहा है। चुनाव से पहले उनका पार्टी छोड़ने से परिवार के प्रभाव क्षेत्र वाले इलाकों में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ेगा। खासकर ऐसे समय में जब अन्य पार्टियां ब्राह्मणों को लुभा रही है वहाँ कांग्रेस से पहले जितिन और अब ललितेश का जाना कहीं से भी शुभ नहीं है। जबकि पूर्वाञ्चल के महराजगंज के कुलीन ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखने वाले खाँटी कांग्रेसी और चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दिग्गज ब्राह्मण नेता शरदेन्दु  कुमार पाण्डेय मानते है कि ये नेता भले ही कद्दावर ब्राह्मण राजनेता परिवार से जुड़े है लेकिन सच्चाई ये है कि इनकी पुश्तैनी राजनीतिक जमीन दरक चुकी है। लगातार पिछले कई चुनाव में इनकी हार इस बात का प्रमाण है। इनके जाने से पार्टी कमजोर होने की बजाय और मजबूत होगी। क्योंकि ये अब पार्टी में घुन की भूमिका निभा रहे थे।

 

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