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बिहार में बारिश का कहर : वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में घड़ियाल के सैकड़ों अंडे बहे

By Shakti Prakash Shrivastva on July 19, 2021
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बगहा, (संवाददाता)। प्रदेश में लगातार हो रही बारिश ने नदियों के जलस्तर में ख़ासी बढ़ोत्तरी कर दी है। गंडक नदी में आए बाढ़ के पानी ने वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बहुत नुकसान कर दिया है। रिजर्व में घड़ियाल के 8 प्रजनन केन्द्रों पर रखे गए 300 से अधिक संख्या में घड़ियाल के अंडे खराब हो गए या बह गए हैं।

बिहार के सीमावर्ती इलाके में बहने वाली गंडक नदी घड़ियालों का अधिवास क्षेत्र है। इसके किनारे दर्जनों की संख्या में घड़ियाल प्रजनन केंद्र हैं। वाल्मीकि टाइगर रिजर्ट की ओर से इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए 8 केंद्रों पर लगभग 300 अंडों को बचाने के लिए ऊंचे स्थानों पर रखा गया था। मूसलाधार बारिश से गंडक नदी में 4.25 लाख क्यूसेक पानी आ जाने से ये सभी अंडे नष्ट हो गए हैं।  टाइगर रिजार्ट  के वन संरक्षण सह निदेशक हेमकांत राय की मुताबिक इस साल 8 जगह पर मगरमच्छों ने अंडे दिए थे। एक जगह पर 30-40 अंडे पाए गए थे। लगभग 300 अंडों को बचाने के लिए ऊंचे स्थान पर रखा गया था लेकिन समय से पहले हुई अधिक बारिश से नदी में अचानक पानी अधिक आ गया लिहाजा बहुत सारे अंडे खराब  हो गए तो कुछ अंडे बह गए। नदी में घड़ियालों की सुरक्षा व संवर्धन के लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व ( VTR) प्रशासन ने 2018 में सर्वेक्षण कराया था। इसमें वाल्मीकिनगर से सोनपुर तक 320 किमी की दूरी में 250 घड़ियाल पाए गए थे। गंडक में इनकी संख्या नियमित रूप से मिली थी। सर्वेक्षण में यह भी बात सामने आई कि गंडक बराज एवं अन्य इलाके में घड़ियालों के आधा दर्जन प्रजनन केंद्र थे। पानी के दबाव से ज्यादातर अंडे नष्ट हो जाते थे। नदी के रेत में मादा घड़ियाल मई महीने में 30-40 सेमी गहरा गड्ढा खोदकर 30-40 की संख्या में अंडे देती हैं। इन्हें बचाने के लिए एक्सपर्ट की मदद से घड़ियालों के अंडे को ऊंचे स्थान पर रखा जाता है। इस साल भी ऐसा ही किया गया था, लेकिन गंडक नदी में अचानक लगभग 4.25 लाख क्यूसेक पानी आने के कारण अंडों को बचाया नहीं जा सका।2012 में बिहार सरकार का ध्यान इस ओर गया और उनके पुनर्वास के लिए वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट से तकनीकी मदद मांगी। 2015 के सर्वेक्षण में गंडक में 54 घड़ियाल पाए गए, जिनमें 26 घड़ियाल वयस्क थे। बाद में पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान जैसे स्थलों में रखे गए घड़ियालों के प्राकृतिक प्रजनन के लिए गंडक में ऐसे सुरक्षित स्थानों को चिह्नित किया गया, जहां उन्हें छोड़ा जा सकता था। घड़ियालों की पहचान के लिए एक निश्चित निशान देकर उच्च फ्रीक्वेंसी के रेडियो उपकरणों व सैटेलाइट ट्रांसमिशन जैसे निगरानी उपकरणों से जोड़ा गया। कुछ वर्ष पूर्व ऐसे 116 घड़ियालों को गंडक में छोड़ा गया था। वर्तमान में लगभग 300 घड़ियाल हैं।

 

 

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