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योगी के कार्यकाल में बनेगा राममंदिर: महंत नृत्य गोपाल दास

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फैज़ाबाद : भले ही मंदिर मसले पर लगातार सुनवाई और शीघ्र फैसले की उम्मीदें धूमिल पड़ती जा रही हों पर रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत श्री नृत्यगोपाल दास को पूरा भरोसा है कि केंद्र में मोदी और राज्य में योगी की युति बनने से मंदिर निर्माण अब अवश्यंभावी है. संदीप श्रीवास्तव ने महंत नृत्यगोपाल दास से बातचीत की। पेश है बातचीत के संक्षिप्त अंश...
 
प्रश्न- मोदी जी का जन्म राम मंदिर निर्माण के लिए ही हुआ है यह बात आप ने कही थी, लेकिन न तो मोदी जी और न ही पार्टी इस मामले में बहुत खुल कर सामने नहीं आ रहे, अब जब सब अनुकूल है तब अड़चन क्या है?
उत्तर- मोदी जी चाहते हैं कि राम मंदिर शीघ्र बने लेकिन मामला न्यायालय में होने के कारण वे पहल नहीं कर सकते, पार्टी के भी हाथ बंधे हैं. न्यायालय भी जनता की आवाज सुनता है। हमें भी आशा है कि न्यायालय जनता की आवाज सुनकर जल्द से जल्द फैसला करेगा। शीघ्र ही भव्य राम मंदिर निर्माण आरंभ हो जायेगा.
प्रश्न- पर उच्चतम न्यायालय ने तो पहले सुलह समझौते से अदालत के बाहर ही मामला निबटाने की बात कही थी, वह एक बढिया अवसर था,पर आपने उसके लिये कोई प्रयास नहीं किया. हालांकि अब उस अवसर की समय सीमा जाती रही पर क्या आप मामले को सुलझाना नहीं चाहते या बातचीत के खिलाफ हैं ?
 उत्तर- हम बातचीत के विरुद्ध नहीं है, राम मंदिर विवाद शीघ्र सुलझ जाये यह हमारी भी ईच्छा है.पर हम इस बात पर बातचीत या सुलह समझौते के पक्षधर नहीं हैं. अदालत को क्या चाहिये साक्ष्य, साक्ष्य हमारे पक्ष में हैं फिर हम किस मुद्दे पर बात करें. अदालत को पीड़ित पक्ष को न्याय देना चाहिये न कि सुलह समझौते की सलाह. सर्वोच्च न्यायालय का यह देश सम्मान करता है, हम भी. परन्तु श्रीराम जन्म भूमि को लेकर सुलह समझौते का अब कोई औचित्य नहीं. अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण ही चल रहे विवाद का एकमात्र हल है.
प्रश्न – अब अदालत ने जल्दी जल्दी सुनवाई के लिये दी गयी स्वामी की याचिका पर भी जवाब दे दिया है कि वे पक्षकार नहीं है ऐसे में आप कैसे आशा लगाये हुए हैं कि अदालत जनता की आवाज पर अगले कुछ महीनों में फैसला दे देगी, निर्णय आपके पक्ष में होगा और जल्द ही मंदिर बनना शुरू हो जाएगा? 
उत्तर- अदालत अब और देर नहीं कर सकती हमें उस पर पूरा भरोसा है, इसलिए भी कि साक्ष्य हमारे साथ हैं और सरकार तथा जनसमर्थन भी.
प्रश्न- विनय कटियार ने कहा अदालती फैसला देर लगाने वाला है। हमें इसका सामाजिक हल निकालना होगा। राम मंदिर आंदोलन सरकार या न्यास ने नहीं दूसरे हिंदू संगठनों और लोगों चलाया था। एक बार फिर लोगों को जुटाना, संगठन खड़ा करना होगा, बलिदान देना होगा। ऐसे लोगों में अब कितनी उम्मीद बची है, आप कितने सहमत है?
उत्तर- विनय कटियार जी का हम सम्मान करते हैं। वे हमारे पुराने नेता हैं, यह उनका अपना विचार है, उनकी सोच का आधार उनके पास होगा, मेरा यह स्पष्ट मानना है कि मोदी जी के इसी कार्यकाल में ही मंदिर निर्माण आरंभ हो जाएगा।
प्रश्न- पिछले साल भी आपने कहा था राम मंदिर बनाने का समय अब आ गया है? वह साल अब गुजर गया. इस साल क्या तैयारी है, क्या उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद अब राम मंदिर बनना निर्माण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर- राम जन्म भूमि निर्माण में सबसे बड़ी बाधा अदालत और कानून की है इसलिए विलम्ब हो रहा है। कानूनी बाधा तो अभी भी जस की तस है पर तब केंद्र में सरकार तो अपनी थी पर कुछ कर नहीं पा रही थी, प्रदेश में अपनी सरकार नहीं थी, अब प्रदेश में राममंदिर निर्माण का समर्थन करने वाले योगी आदित्य नाथ सत्तासीन हैं, अपनी सरकार है. अब केंद्र और राज्य में अपनी सरकार होने, राज्यसभा में भी भाजपा का संख्याबल बढ़ने से सब बाधाएं दूर हो जायेंगी. अब केंद्र सरकार को पहल कर के संसद से कानून बनवाकर मंदिर बनाने का रास्ता प्रशस्त करेगी. मुझे विश्वास है कि दिल्ली में नरेंद्र मोदी और लखनऊ में योगी राम मंदिर बनाने का रास्ता निकालेंगे. योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश में बनने वाली सरकार विकास के साथ ही रामराज्य की परिकल्पना को अवश्य साकार करेगी।   
  प्रश्न- बहुमत की सरकार द्वारा कानून बना कर मंदिर बनाने का रास्ता निकाल लेने से दूसरा पक्ष कैसे लेगा? क्या नया विवाद और विभाजन नहीं पैदा होगा, इससे सामाजिक समरसता प्रभावित हो सकती है?
उत्तर-  यह आशंका निर्मूल है, कानून बना कर मंदिर निर्माण भला विभाजन को क्यों जन्म देगा? बहुसंख्यक की भावनायें ऐसी नहीं हैं. वे राम मंदिर चाहते हैं कोई समझौता या बीच का रास्ता नहीं. देश के विभाजन के दो वर्ष बाद ही सरदार पटेल और अन्य नेताओं के कुशल प्रयास से गुजरात के सोमनाथ ज्योतिलिंग पर भव्य मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया था. कोई सामाजिक समरसता नहीं बिगड़ी, ऐसे दूसरे उदारहण भी हैं. इसके विपरीत अयोध्या मे श्रीराम जन्मभूमि का विवाद न्यायालय के चक्कर लगाता रहा. अगर उसी समय इसका समाधान कर दिया जाता तो शायद इतना खून-खराबा नहीं होता. इसलिये जितनी शीघ्रता से इसका समाधान निकाला जायेगा वही उचित होगा, जब बात न्यायोचित होगी तो कोई सामाजिक सद्भाव क्यों बिगड़ेगा, फिर ऐसे लोगों के लिये जो इस तरह का अनुचित कार्य करेंगे उन्हें प्रशासन देखेगा. 
प्रश्न- एक पक्ष हस्ताक्षर अभियान चला रहा है. मंदिर निर्माण के पक्ष में उसने 10 हजार से ज्यादा लोगों के हस्ताक्षर करवाए हैं. पर उनका रुख आपसे अलग है. क्या आप समझते हैं कि उनके इस हस्ताक्षर अभियान से कोई असर पड़ेगा?   
     उत्तर- 10 हजार लोगों का हस्ताक्षर इकट्ठा कर लेना कोई बड़ी बात नहीं जब देश-विदेश के सभी हिंदू भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण चाहते हैं तो ऐसे हस्ताक्षर अभियान का क्या महत्व है?
प्रश्न- क्या अब नयी परस्थितियों में संत व धर्माचार्य लोग शीघ्रताशीघ्र मंदिर निर्माण करने के लिए मोदी जी पर किसी तरह का दबाव डालेंगे? 
उत्तर- अवश्य, यह सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी देश की आन्तरिक परेशानियों से निबटने और विकास की तमाम योजनाएं बनाने का अथक कार्य करने में व्यस्त हैं, उनकी कुछ विदेश यात्राएं भी हैं, और चुनाव जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम. पर कुछ समय बाद हम सभी सन्त व धर्माचार्य मोदी जी का समय लेकर उनसे मिलकर मंदिर निर्माण का कार्य आरंभ कराने और उसके पहले कानूनी अड़चन दूर करने के लिये नया कानून बनवाने के लिये दबाव डालेंगे।
प्रश्न- संघ प्रमुख भागवत जी के अनुसार, अब कर्म ‘शक्ति दिखाने का वक्त आ गया है, परिस्थिति अनुकूल है, हिन्दू समाज में अभी शक्ति है उसे यह ‘शक्ति दिखानी चाहिए? आस्था के मामले को आखिर अदालत कैसे सुलझाएगी,उनके इस बयान को आप किस तरह  लेते हैं, राम मंदिर निर्माण में किस तरह की शक्ति दिखाना अपेक्षित है?
उत्तर- भागवत जी बहुत बड़े ज्ञानी व बुद्धजीवि व्यक्ति हैं। उनके कहने का आशय कि देश के सारे हिन्दू एकत्र हो जाए तो अभी कल से मंदिर निर्माण आरंभ हो जाएगा। लोग मंदिर को राजनीति से जोड़ते हैं। इसे राजनीति से जोड़ना ठीक नहीं, मंदिर निर्माण भगवान राम का काम है और भगवान राम सबके हैं।
प्रश्न- चरण दबाकर संत बने, गला दबाकर महंत, यह जुमला लोगों में आम है, अयोध्या के साधु वर्ग का एक बड़ा तबका अपराध करने में लिप्त है। भक्त महल, मारवाड़ी धर्मशाला और ऐसे ही कुछ दूसरे मामलों में आपका भी नाम आया। 300 से ज्यादा साधुओं महंतों पर मुकदमे हैं यह संस्कृति कैसे पनपी?
उत्तर- देखिये जो लोग केवल साधू का बाना बना कर घूमते हैं, वे साधू नहीं है, उनका हाल रावण जैसा होता है. रावण ने साधू वेश धारण कर माता सीता जी का हरण किया, किन्तु जो सही साधू हैं उनका सब सम्मान करते हैं।