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इलाहाबाद: डीएलएड कॉलेज खोलने पर लगेगी रोक

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इलाहाबाद : प्रदेश में निजी डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन यानी डीएलएड (पूर्व बीटीसी) कालेजों की बाढ़ आ गई है। इस समय करीब ढाई हजार से अधिक निजी कालेज संचालित होने जा रहे हैं और कई कालेज मान्यता व संबद्धता पाने की दौड़ में शामिल हैं। सूबे में अब हर साल दो लाख से अधिक प्रशिक्षु तैयार होंगे, जबकि जरूरत 10 से 15 हजार की ही है। सरकार नए निजी कालेजों पर अंकुश लगाने पर मंथन कर रही है। प्रदेश के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान यानी डायट, निजी डीएलएड और अल्पसंख्यक कालेजों से बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों के लिए शिक्षक तैयार होते हैं। 


बीटीसी सत्र 2012-13 तक सिर्फ डायट ही प्रशिक्षु शिक्षकों को ट्रेनिंग देते थे, लेकिन 2013-14 सत्र से निजी कालेजों को संबद्धता देने का सिलसिला शुरू हुआ। पहले साल महज 698 निजी कालेजों को परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव के यहां से संबद्धता मिली थी, जो सत्र 2017-18 तक आते-आते बढ़कर 2558 हो गई है। तमाम कालेज तय समय में आवेदन नहीं कर सके इसलिए उन्हें इस साल संबद्धता नहीं मिल सकी। ऐसे में कालेज संचालकों ने कोर्ट में याचिका दायर की है, वहीं तमाम ऐसे भी कालेज भी हैं जो मान्यता लेकर आगे के सत्रों में संबद्धता की लाइन में लगे हैं। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के अनुसार इस साल ही दो लाख 11 हजार 600 सीटों पर अभ्यर्थियों को प्रवेश दिया जाना है। यह संख्या का आने वाले वर्षो में और बढ़ना तय है। ऐसे में प्रदेश सरकार निजी कालेजों की बाढ़ से परेशान हो उठी है और उस पर प्रभावी अंकुश लगाने की तैयारी है। इसकी वजह यह है कि परिषदीय कालेजों के लिए हर साल करीब 10 से 15 हजार शिक्षक सेवानिवृत्त होते हैं, उन्हीं पदों को इन प्रशिक्षुओं से भरा जाना है, तब बाकी प्रशिक्षुओं की भीड़ का क्या होगा?