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यूपी को बाढ़ से बचाने में क्या है पेंच? जानिए

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गोरखपुर : इन दिनों उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिले बाढ़ की विनाशलीला झेल रहे हैं। टीवी पर दिखने वाली बर्बादी की तस्वीरें परेशान करने के लिए काफी हैं। यूपी में गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज और गोंडा जैसे जिलों में हालात खतरनाक बने हुए हैं। वहीं, बिहार के 14 जिले खासकर, अरहरिया, सुपौल, किशनजंग, कटिहार, पूर्णिया, पूर्वी तथा पश्चिमी चंपारण, दरभंगा और सीतामढ़ी जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। बाढ़ में अब तक 100 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। बाढ़ की वजह से नेपाल से बारिश के दिनों में छोड़ा जाने वाला करोड़ों लीटर पानी जो भारत के मैदानी इलाकों में भीषण बाढ़ का सबब बनता है। 


क्या हो सकता है समाधान?

एक बार कुछ वर्ष पहले जब नेपाल में मित्रवत सरकार थी तब करीब-करीब इस बात पर सहमति हो गई थी कि नेपाल से निकलने वाली नदियों पर नेपाल के क्षेत्र में ही बांध और बराज बनाए जाएंगे और उससे प्राप्त होने वाली बिजली से नेपाल व बिहार दोनों को लाभ पहुंचेगा। भारत का कहना था कि उसने भूटान की नदियों को भी बांधा है, वहां बराज बनाए हैं और बड़े बड़े बिजली घर बनाए हैं। वहां बहुत अधिक बिजली का उत्पादन होता है, जिसमें से 90 प्रतिशत बिजली भारत सरकार खरीद लेती है। अगर नेपाल में ही बांध बनाकर पानी को रोका जाए तो बहुत हद तक यूपी-बिहार को बाढ़ की त्रासदी से बचाया जा सकता है। 


क्या है दिक्कत?

भूटान में बनने वाली बिजली का 90 फीसदी हिस्सा भारत खरीद लेता है। लेकिन उसका भुगतान भारतीय मुद्रा में किया जाता है। भारत सरकार यही व्यवस्था नेपाल में करना चाहती है। वहां जो बिजली पैदा होगी उसका 80 प्रतिशत भाग भारत खरीद लेगा। मगर इसका भुगतान भूटान की तरह नेपाल को भारतीय मुद्रा में किया जाएगा। नेपाल की सरकार इस बात के लिए तैयार नहीं हुई। वह भुगतान ‘डॉलर’ में चाहती थी। उसका कहना था कि वह बेशुमार भारतीय मुद्रा को लेकर क्या करेगी? दोनों सरकारें अपनी जिद पर अड़ी रहीं और अंतत: इस योजना का कार्यान्वयन नहीं हो सका। नेपाल सिर्फ अपने स्तर पर बांध और बिजली की इतनी बड़ी परियोजना का खर्च नहीं उठा सकता है।