July 6, 2022
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राज्यसभा नामांकन : और बढ़ेगा गोरखपुर का दबदबा

By Shakti Prakash Shrivastva on May 31, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

उत्तरा प्रदेश में खासकर भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में यूं तो योगी आदित्यनाथ के आगमन से ही पूरे प्रदेश में गोरखपुर का अपेक्षाकृत प्रभाव बढ़ने लगा था। लेकिन जबसे योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री हुए हैं तबसे गोरखपुर के राजनीतिक मान-सम्मान में खासा इजाफा हुआ है। राज्यसभा में प्रतिनिधित्व की बात करे तो वहाँ भी गोरखपुर को लगातार प्रतिनिधित्व मिल रहा है। पिछले कार्यकाल में कद्दावर ब्राह्मण नेता व प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री शिव प्रताप शुक्ल और जय प्रकाश निषाद को प्रतिनिधित्व का अवसर मिला। इस बार होने वाले राज्यसभा के चुनाव में भी जहा कुल ग्यारह सदस्यों को मौका मिलने वाला है। इनमें संख्या बल की वजह से बीजेपी को आठ और समाजवादी पार्टी के तीन सदस्यों को राज्यसभा सांसद बनने का मौका मिलेगा। नामांकन के अंतिम दिन मंगलवार को बीजेपी के तरफ से जिन आठ सदस्यों ने नामांकन किया है उनमें दो गोरखपुर क्षेत्र से है। यानि कि कुल में से 25 फीसद हिस्सेधारी गोरखपुर जिले के हिस्से आई है। ये साबित करता है कि पार्टी की राजनीति में गोरखपुर का प्रभाव कितना है। राजनीति के जानकारों की माने तो अभी ये दबदबा आने वाले समय में और बढ़ेगा। गोरखपुर के दोनों उम्मीदवारों में एक नाम है डॉ राधा मोहन दास अग्रवाल का, जिन्होने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए लगातार कई बार से विधानसभा का प्रतिनिधित्व देने वाले गोरखपुर शहर की सीट छोड़ दी थी। उसी समय से जानकारों को इस बात का अंदेशा था की पार्टी उनके अतीत और अनुभवों को देखते हुए कुछ इस तरह का मौका उन्हे देगी। डॉ अग्रवाल विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक भी रहे है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कुछ वैचारिक मतभेद के चलते बहुत दिनों तक डॉ अग्रवाल पार्टी में थोड़ा अलग-थलग भी रहे। लेकिन अब वो भी फिर से मुख्यधारा में आ रहे है। दूसरा नाम है चौरीचौरा से विधायक रही संगीता यादव का। सूत्रों की मुताबिक इनके बारे में कहा जाता है कि पिछले विधानसभा में टिकट काटने के समय ही इन्हे इस तरह कहीं समायोजित किए जाने का पार्टी ने भरोसा दिलाया था। बीजेपी ने राज्यसभा के लिए इस बार डॉ राधामोहन दास अग्रवाल  और संगीता यादव के अलावा लक्ष्मीकांत वाजपेयी, दर्शना सिंह, बाबू राम निषाद, सुरेंद्र सिंह नागर, मिथिलेश कुमार और डॉ. के लक्ष्मण को उम्मीदवार बनाया है। मौजूदा समय में यूपी विधानसभा में भाजपा गठबंधन के 273 और सपा गठबंधन के 125 विधायक हैं। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक और कांग्रेस के दो-दो तथा बसपा का एक विधायक है। माना जा रहा है कि जनसत्ता दल के दो विधायकों का समर्थन भाजपा को मिल सकता है। जबकि कांग्रेस और बसपा का किसी भी दल से गठबंधन नहीं होने से दोनों दल चुनाव से बाहर रह सकते है। राज्यसभा में प्रतिनिधित्व के लिए एक सीट के लिए 36 विधायकों का वोट होना चाहिए। भाजपा के पास 273 विधायक है, ऐसे में उन्हें प्रथम और द्वितीय वरीयता क्रम के मतदान के आधार पर 8 सीट जीतने में कोई परेशानी नहीं होगी। सपा के पास 125 विधायक हैं। इस आधार पर उसे 3 सीट जीतने में कोई दिक्कत नहीं है। समाजवादी पार्टी की तरफ से समर्थन में जो तीन उम्मीदवारों ने नामांकन किया है उनमें सुप्रीम कोर्ट के वकील और हाल ही में कांग्रेस छोड़ने वाले कपिल सिब्बल, विधानसभा चुनाव से प्रदेश में पार्टी के साथ साझेदारी निभा रही राष्ट्रीय लोकदल पार्टी के मुखिया जयंत चौधरी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जावेद अली है।

 


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