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DGP हटाना महज बानगी, नौकरशाहों मुगालते से बाहर आओ : योगी जी फार्म में हैं

By Shakti Prakash Shrivastva on May 11, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

               उत्तर प्रदेश में हाल की गतिविधियों को देखते हुए हर वो व्यक्ति यह लाइने कह सकता है जो गोरक्ष पीठाधीश्वर और सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के कार्य व्यवहार से बखूबी वाकिफ है। सरकार के पहले कार्यकाल की समीक्षा करते हुए योगी आदित्यनाथ के तेवर की अपने ढंग से व्याख्या करते हुए कोई भले ही किसी तरह का मुगालता पाल ले। लेकिन योगी वही हैं जिनके लिए उनकी औरों से अलग पहचान है। अलबत्ता पिछली सरकार में विशिष्ट पद के विशिष्ट अनुभव का मामला रहा हो या वाकई परंपरागत राजनीति की अंदरखाने के ककहरा समझने का उनका अपना अंदाज जिसके नाते पिछली बार उनके व्यक्तित्व के कुछ आयाम लोगों के सामने नही आ सके। इसकी वजह एक कोरोना संकट भी हो सकता है। लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी नही है। योगी आदित्यनाथ बिंदास अपने अंदाज में आते हुए अब दिखने लगे हैं। एक दिन पहले ही प्रदेश के नए एडवोकेट जनरल की नियुक्ति में ही उन्होंने अपने व्यक्तित्व पर जाति विशेष का मुलम्मा चढ़ाने वालों को एक स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने राघवेंद्र सिंह की जगह पर अजय मिश्र को प्रदेश का नया महाधिवक्ता बनाया है। अभी आगे-पीछे सोचने-समझने वाले राजनेता और अन्य मीमांशा में व्यस्त ही थे कि योगी आदित्यनाथ ने राजनीतिक क्रिकेट के खेल में छक्का सरीखा एक ऐसा दांव चला जो प्रदेश के गुटबाज ब्यूरोक्रेसी की पेशानी पर बल लाने भर के लिए काफी था। प्रदेश में पुलिस विभाग के मुखिया यानि पुलिस महानिदेशक मुकुल गोयल को उन्होंने ऐसे चलता किया जिसकी उन्हे सपने में भी कल्पना नही थी। पुलिस महानिदेशक को हटाने के लिए जिस तरह का आदेश दिया गया उससे स्पष्ट हो रहा है कि मुख्यमंत्री सूबे की सियासत में अपनी घुसपैठ कर नौकरी कर रहे ब्यूरोक्रेट्स को संभलने का मौका देते हुए सचेत कर रहे है। ऐसा आदेश की भाषा बताती है जिसमें लिखा है कि ‘मुकुल गोयल को शासकीय कार्यों की अवहेलना करने, विभागीय कार्यों में रुचि न लेने एवं अकर्मण्यता के चलते पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश के पद से मुक्त करते हुए डीजी नागरिक सुरक्षा के पद पर भेजा जा रहा है।‘ मेरी जानकारी में ऐसा नही है कि डीजीपी रैंक के किसी अधिकारी के लिए कभी इस तरह की शब्दावली वाले आदेश का इस्तेमाल किया गया हो। इतना ही नहीं उसे ऐसा सार्वजनिक भी नहीं किया गया है। अपने विशिष्ट कार्यशैली की वजह से ही सांसद वो भी अधिकांशतः विपक्ष का सांसद रहते हुए योगी आदित्यनाथ गोरखपुर क्षेत्र में पदस्थापित पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को कभी पद और प्रभाव के मुगालते में नही रहने देते थे। अब अपने उसी तेवर का प्रदर्शन योगी ने शुरू कर दिया है। आपको याद होगा कि दूसरी बार सरकार बनने के शुरुआती दिनों में ही योगी ने अपने पार्टी के जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को परंपरागत तरीके की राजनीति से अपने को दूर रखने का निर्देश दिया था। उस निर्देश का सीधा अर्थ ये था कि आप नियंत्रित रहो, रही बात ब्यूरोक्रेसी की तो इन्हे हम समय पर अपने ढंग से ठीक कर देंगे। अब वही शुरुआत उन्होंने कर दी है। इस तौर-तरीके के बाद भी अगर प्रदेश के ब्यूरोक्रेट्स ने सुधारवादी रवैया अख्तियार नहीं किया तो फिर मुख्यमंत्री कार्यशैली का अगला शिकार वो भी हो सकते है।


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