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शंखनाद : जाति-धर्म के इर्द-गिर्द ही घूम रही बस्ती मण्डल में सियासत चुनावी

By Shakti Prakash Shrivastva on January 18, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

ऐसे में जब कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। राजनीतिक दलों ने भी एक-एक कर अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणाएँ करनी शुरू कर दी हैं। हालांकि बस्ती मण्डल के तीनों जिलो में आने वाले सभी 13 विधानसभा सीटों पर अभी कुछ एक को छोड़ अधिकांश दलों के उम्मीदवारों के नामों की घोषणा होना बाकी है। लेकिन दलों के इलाकाई समीकरण और उसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए चाय की दुकान और गली-मुहल्लों में जीत-हार के समीकरण बनने-बिगड़ने शुरू हो गए है। गाँव के चौपाल भी इससे अछूते नहीं है। पिछले चुनाव यानि 2017 की बात करे तो बस्ती मण्डल कि सभी सीटों पर बीजेपी और उसके सहयोगी दलों का ही कब्जा था। बीएसपी, एसपी और कांग्रेस जैसे दलों कि यहाँ बोहनी तक नहीं हुई थी। बस्ती की 5 और संतकबीर नगर की सभी 3 सीटों पर बीजेपी विजयी रही जबकि सिद्धार्थनगर के 5 में से 4 पर बीजेपी और 1 पर उसकी सहयोगी अपना दल का परचम लहराया था। इस बार परिस्थितियाँ बदली है। ग्राउंड रिपोर्ट के लिए जब ईलाके का भ्रमण किया गया तो समझ आया कि इस बार बाते तो विकास की हो रही है लेकिन कही न कही ध्रुवीकरण का भी खासा प्रभाव दिख रहा है। इस जाति और धर्म आधारित ध्रुवीकरण इलाके के परिणाम पर अपना असर दिखाएगी। संतकबीरनगर जिले के खलीलाबाद विधानसभा में बस स्टैंड पर खड़े राधा प्रताप से पूछा तो उनका कहना था कि क्षेत्र में बीजेपी व सपा का ज्यादा जोर दिख रहा है। साथ खड़े बिरचू भगत ने भी हां में हां मिलाई। पास के ठेले वाले राजू ने कहा कि बीएसपी का भी मामला हैं, वो भी लड़ाई में रहेगी। मगहर में चाय कि दुकान पर लोग कटाई मिल बंदी को लेकर पार्टियों से नाखुश दिखे। अधिकांश ने लड़ाई बीजेपी और एसपी में ही बताया। मेंहदावल विधानसभा क्षेत्र में बखिरा चौराहे पर इलाकाई ग्रामीणो की चौपाल मतलब 2 दर्जन लोग चर्चा में मशगूल थे। वहाँ एक मुखर वक्ता रामलाल पूरे जोश में सभी दलों को एक जैसा ही प्रमाणित करने में तल्लीन थे। उनका कहना था कि क्या बीजेपी,एसपी और क्या कांग्रेस,बीएसपी सभी एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। विधूना देवी कि मुताबिक इलाके में तो फिलहाल भाजपा व सपा की ही ज्यादा चर्चा है। राजबली कहते हैं, आईटीआई, नर्सिंग कॉलेज, सड़क, नाली, बिजली के क्षेत्र में अच्छा काम हुआ है। तो भानुयापार के महंत का कहना है कि क्षेत्र की जर्जर सड़कों का मुद्दा उठाकर उनकी घेरेबंदी शुरू कर दी है जहां जाति और धर्म के नाम पर ही वोट पड़ता हो, वहां विकास हो भी तो कैसे? सिद्धार्थनगर जिले के कपिलवस्तु विधानसभा क्षेत्र के बर्डपुर में रामधनी और बिलास पांडे मिले इनकी मुताबिक अबकी बार लड़ाई तगड़ी है। बर्डपुर निवासी मंतोष कुमार व सुल्तानपुर निवासी धर्मेंद्र चौबे ने मुख्य सड़क के निर्माण, स्वास्थ्य सुविधा बेहतर होने का हवाला देते हुए सरकार के कामों की तारीफ की। बांसी की बात करें तो यह विधानसभा क्षेत्र स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह का है। क्षेत्र के तिलक इंटर कॉलेज के सामने की दुकान पर चुनावी बहस छिड़ी मिली। मझवान के अनुज ने कहा, सड़कों का निर्माण तो हुआ, लेकिन सही ढंग से देखरेख नहीं हो सकी। पप्पू ने बिजली आपूर्ति को ऐतिहासिक बताया। डुमरियागंज में मिले कासिम अली, रामा कसौधन चुनावी माहौल की चर्चा छिड़ते ही कहते हैं, भाजपा और सपा ने ज्यादा जोर लगा रखा है। रामबाली पटेल, जगधारी और केवल ने कहा कि चुनाव आते-आते ध्रुवीकरण की राजनीति हावी होती जा रही है। इटवा विधानसभा क्षेत्र के गनवरिया में अलाव तापते मिले राम अंजोर कहते हैं, तीर्थ स्थलों के विकास से लोगों में खुशी है। भिंगा के रामसागर कहते हैं, इस सरकार में पिछड़ों को कोई तवज्जो नहीं मिली। शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के मधवापुर निवासी भूतेलू ने कहा कि जब चुनाव नजदीक आ गया, तब बिजली के दामों में कमी की गई है। बस्ती सदर के रौता चौराहे पर मिले अभय श्रीवास्तव कहते है कि फिलहाल बीजेपी व एसपी के बीच ही मुक़ाबला दिख रहा है। रौता चौराहे के ही पुनीत ओझा ने कहा गरीबों के लिए आवास व मुफ्त राशन का इंतजाम चुनाव मेन फायदा पहुंचाएगा। कप्तानगंज चौराहे पर कौड़िकोल के संजीव मिले उनका कहना कि जो विकास की बात करेगा वही जीतेगा। भूपेन्द्र चौधरी ने कहा कि सरकार का मुख्य मुद्दा विकास होना चाहिए। वहीं रुधौली के राजशेखर कहते है बीजेपी को इस बार मेहनत करनी पड़ेगी। बस्ती-माहुली मार्ग के बांकती बाजार मेन चाय की दुकान पर मिले सूरज कहार कहते है कि अबकी बार लड़ाई त्रिकोडीय है लेकिन बीजेपी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी।

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