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BJP का मिशन यूपी : ‘ब्राह्मण’ तीर से लक्ष्य साधने की ज़िम्मेदारी शिव प्रताप को

By Shakti Prakash Shrivastva on December 27, 2021
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

          उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी प्रभावी उपस्थिति रखने वाला ब्राह्मण समाज इस बार 2022 के विधानसभा चुनाव में भी अपनी वजनी भूमिका रखे हुए है। खासकर जबसे कानपुर में बिकरू कांड हुआ, उसके बाद से अचानक प्रदेश की फिंजा में यह बात आम और खास की बहस में मुद्दा बन गया। मीडिया के प्रिंट और इलेक्ट्रानिक माध्यमों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी यही चर्चा होने लगी कि बीजेपी की सत्तारूढ़ सरकार में ब्राह्मणों के साथ अन्याय हो रहा है। सरकार ब्राह्मणो को बेवजह प्रताड़ित कर रही है। चुन-चुन कर ब्राह्मणों की हत्याएं हो रही है और यह सब सरकार के मुखिया के इशारे पर किया जा रहा है। सरकार बनने के तुरंत बाद गोरखपुर में योगी के परंपरागत विरोधी पंडित हरिशंकर तिवारी के आवास पर हुए पुलिसिया कार्रवाई को इसके आधार के रूप में प्रस्तुत किया जाने लगा। सच्चाई जो भी हो लेकिन यह तय है कि प्रदेश में सपा, बसपा और कांग्रेस के बाद अब बीजेपी के भी चुनावी एजेंडे मे ब्राह्मण अहम हो गया है। बाकायदे पार्टी ने ब्राह्मणों को मनाने-रिझाने के लिए 16 सदस्यीय एक टीम भी गठित की है जिसकी कमान राज्यसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक सांसद शिव प्रताप शुक्ल को सौंपी गयी है। पार्टी के पुराने विश्वसनीय और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे गोरखपुर निवासी शिवप्रताप के कंधे पर यह ज़िम्मेदारी दे पार्टी ने एक तीर से कई निशाने साधने का कार्य किया है। माना जाता है कि शिवप्रताप के संबंध, योगी विरोधी और पूर्वाञ्चल की राजनीति में प्रभावी हैसियत रखने वाले हरिशंकर तिवारी के कुनबे से भी मधुर है। तिवारी कुनबा (पूर्व विधान परिषद सभापति गणेश शंकर पाण्डेय, पूर्व खलीलाबाद सांसद भीष्मशंकर तिवारी और चिल्लूपार से मौजूदा विधायक विनयशंकर तिवारी) हाल ही में बसपा छोड़ सपा में शामिल हुआ है। ऐसे में शिवप्रताप न केवल इलाकाई बिरादरी में सेंधमारी करने में सफल होंगे बल्कि कई प्रभावशाली ब्राह्मण चेहरों को पार्टी में शामिल भी कराएंगे। लखनऊ में पिछले तीन दशक से प्रदेश की राजनीतिक घटनाक्रम  को नजदीक से देखने-परखने वाले वरिष्ठ पत्रकार प्रद्युम्न तिवारी का मानना है कि एक समय राजनीति में ब्राह्मणों की  पहली पसंद कांग्रेस हुआ करती थी लेकिन बदले वक्त में ब्राह्मण समाज का पसंदीदा राजनीतिक दल बीजेपी है। नौ-दस फीसद ब्राह्मण वोटों में अधिकांश की पसंद यही दल है। रही बात आज की तो प्रदेश में हो रहे परिस्थितिजन्य राजनीतिक ध्रुवीकरण में ब्राह्मणों के लिए बीजेपी के अलावा कोई और दल मुफीद भी नहीं दिखता है। जहां तक पार्टी के मौजूदा प्रयास की है तो वो सही समय पर उठाया गया सही कदम है। यदि कहीं कुछ संवादहीनता व भ्रम की वजह से पार्टी को नुकसान होने की स्थिति बनती भी तो इस कवायद से समय रहते वो दूर हो जाएगी। निःसन्देह ब्राह्मण सांसद-मंत्रियों की यह टीम पार्टी के लिए लाभकारी ही साबित होगी। शिवप्रताप शुक्ल को सरकार और संगठन का खासा तजुर्बा है और इसका लाभ भी पार्टी को मिलेगा। समाजसेवी सुनील श्रीवास्तव भी मानते है कि शिवप्रताप शुक्ल एक अनुभवी राजनेता है। अभी तक उन्हे पार्टी ने जो भी टास्क दिया उसे बखूभी अंजाम तक उन्होने पहुंचाया है। इस ज़िम्मेदारी को भी वो बखूबी निभाएंगे। ब्राह्मण समाज का समर्थन इस चुनाव में भी बीजेपी को ही मिलेगा। शिवप्रताप की अगुवाई में नवगठित टीम के सदस्यों ने सोमवार को दिल्ली में बीजेपी सुप्रीमो जेपी नड़ड़ा से मुलाक़ात भी की। सदस्यों ने अपने-अपने तरीके से श्री नड़ड़ा से ब्राह्मणो को पार्टी के पक्ष में करने के सुझाव दिये। श्री नड़ड़ा ने सदस्यों से ब्राह्मणो की नाराजगी संबंधी न केवल चर्चाएं की बल्कि उस बाबत रणनीति भी साझा किए। मुलाकातियों में सांसद और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री महेश शर्मा, योगी सरकार में मंत्री श्रीकांत शर्मा, ब्रजेश पाठक, सत्यदेव पचौरी, आनंद स्वरूप शुक्ल, सतीश द्विवेदी, सांसद रमापति राम त्रिपाठी, अनिल शर्मा जैसे नेता शामिल रहे।     

 

 


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