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रिपोर्टिंग से हो रहा है देश का नाम खराब : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जानिए क्यूँ कहा

By Shakti Prakash Shrivastva on September 2, 2021
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नयी दिल्ली, (संवाददाता)। रिपोर्टिंग से हो रहा है देश का नाम खराब यह सुनकर प्रश्न उठना लाजिमी है कि आखिर मीडिया में किस तरह की जा रही रिपोर्टिंग से ऐसा हो रहा है। इस प्रश्न का जवाब देश की सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान गुरुवार को कोर्ट द्वारा की गयी टिप्पड़ी में मिल गया। पिछले साल दिल्ली में तबलीगी जमात को लेकर दायर याचिका की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एन वी रमन्ना ने मीडिया के एक तबके में कम्यूनल टोन में की जा रही रिपोर्टिंग पर नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी में कहा कि इस तरह की रिपोर्टिंग से आखिरकार देश का नाम खराब होता है। यह तबका हर एक घटना को कम्यूनल एंगिल से दिखा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर आए दिन वायरल हो रहे फेक न्यूज पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने वेब पोर्टल की जवाबदेही पर भी प्रश्न खड़ा करते हुए टिप्पणी की। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि वेब पोर्टल पर किसी का नियंत्रण नहीं है। हर खबर को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश हो रही है, जो कि एक बड़ी समस्या है। चीफ जस्टिस ने कहा कि ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अगंभीर खबरों का जिस तरह से प्रसारण हो रहा है चिंतनीय है। ये प्लेटफार्म संस्थानों के खिलाफ लिखते रहते हैं यहाँ तक कि जजों का जवाब भी नहीं देते। इन पर फर्जी बाड़े रोकने का कोई नियंत्रण नहीं है। कोई भी यूट्यूब पर चैनल शुरू कर सकता है। जस्टिस रमना ने कहा कि मैंने कभी फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब की ओर से कार्यवाही होते नहीं देखी। वो जवाबदेह नहीं हैं, वो कहते हैं कि ये हमारा अधिकार है। वे केवल शक्तिशाली लोगों को ही जवाब देते हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले पर कोर्ट को जवाब दिया कि नए IT रूल्स सोशल और डिजिटल मीडिया को रेग्युलेट करने के लिए बनाए गए हैं और रेग्युलेट करने का प्रयास जारी है। उन्होंने कोर्ट से गुहार लगाई कि अलग-अलग हाईकोर्ट्स में IT रूल्स को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर किया जाए।


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