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ब्लाक प्रमुखी ‘उपद्रव’ : सपा की सुस्ती पर ललकारे जा रहे हैं सुप्रीमो अखिलेश यादव

By Shakti Prakash Shrivastva on July 9, 2021
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लखनऊ, (शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव)। प्रदेश में चल रही ब्लाक प्रमुख चुनाव की प्रक्रिया के दौयरन जिस तरह हिंसा की खबरें मीडिया की सुर्खियां बन रही हैं। उससे राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम आदमी भी हैरान है। राजनीतिक दलों ने इसके लिए सरकार को घेरा भी लेकिन अधिकांश दलों को इस बात का आश्चर्य है कि प्रदेश में सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार समाजवादी पार्टी (सपा) ने उस तरह विरोध या प्रदर्शन क्यों नही किया जिसके लिए उसे जाना जाता है। वो भी तब जब प्रदेश के विधान सभा चुनाव नजदीक है। इसके लिए एक तरफ जहां मायावती ने बिना नाम लिए सपा सुप्रीमो को ललकारा वही दूसरी ओर बिहार में जन अधिकार पार्टी के मुखिया पप्पू यादव ने तो बाकायदा नाम लेकर धिक्कार के साथ चुनौती देते हुए ललकारा।

पूरे प्रदेश में इन दिनों ब्लाक प्रमुख चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। नामांकन के दिन गुरुवार को तो पूरे सूबे में अराजक स्थिति बन गयी थी। गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, संतकबीर नगर, सिद्धार्थ नगर, जौनपुर, लखीमपुर, अयोध्या, अम्बेडकरनगर, फ़तेहपुर, रायबरेली, बहराइच सहित शायद ही प्रदेश का कोई जिला होगा जहां से मारपीट-धक्का-मुक्की, पर्चा फाड़ने जैसी वारदात की खबर न आई हो। इस पूरे घटनाक्रम पर बसपा सुप्रीमो मायावती सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव पर काफी तल्ख दिखी। अखिलेश का नाम लिए बगैर उन्होने कहा कि अब भी भाजपा सरकार के विरूद्ध सपा जो जुबानी विरोध व आक्रामकता दिखा रही है वह घोर छलावा व अविश्वसनीय है। इन्हीं सब सत्ता के दुरुपयोग व हर कीमत पर चुनाव जीतने आदि के लिए सपा का पूरा शासनकाल काफी चर्चाओं में रहा। जनता कुछ भी नहीं भूली। बात-बात पर ’हल्लाबोल’ के तेवर वाली सपा लगातार हो रहे इस तरह के अन्याय-अत्याचार व हिंसा आदि पर अभी तक निष्क्रिय क्यों है? यह सोचने की बात है। इतना ही नहीं प्रदेश से बाहर भी इन  घटनाओं को लेकर दूसरे दलों के नेताओं में कितनी उत्सुकता है ये बिहार में जन अधिकार पार्टी के प्रमुख पप्पू यादव द्वारा किए गए तल्ख ट्वीट से समझा जा सकता है। सपा सुप्रीमो पर हमलावर होते हुए श्री यादव ने ट्वीट किया कि अखिलेश बाबू आप से न हो पाएगा, सड़क पर संघर्ष। इतनी बड़ी पार्टी, इतना संसाधन हो तो बीजेपी वालों की गुंडई और मैं ढोंगी के दुःशासन का होश ठिकाने लगा देता। उनकी मुताबिक एक बहन का बीच सड़क पर चीरहरण हो रहा है और आप आराम से बैठे हो। जेल से निकलता हूं, संघर्ष के लिए पार्टी आउटसोर्स कर दीजिएगा। फिर दिखाते हैं। राजनीतिक के जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनावों में हर बार कमोबेश ऐसी ही स्थिति देखने को मिलती है। रही बात कुछ एक जगहों में इस बार अति देखी गयी। जैसे सिद्धार्थनगर में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और सपा के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पाण्डेय के साथ जिस तरह का व्यवहार या लखीमपुर में महिला के साथ दुर्व्यवहार की घटना जो वायरल वीडियो में दिखा उसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। रही बात मायावती या पप्पू यादव की तो वो एक स्वाभाविक उद्गार है जो अखिलेश यादव से अपेक्षित विरोध न किए जाने पर आया है।


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