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रिवरफ्रंट घोटाले का गोरखपुर कनेक्शन : बीजेपी विधायक राकेश के घर CBI का छापा

By Shakti Prakash Shrivastva on July 5, 2021
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गोरखपुर, (संवाददाता)। योगी सरकार की प्राथमिकता में शुमार रिवरफ्रंट घोटाले में सोमवार को CBI की तरफ से भी बड़ी कार्रवाई की गयी है। इसकी अलग-अलग टीमों ने पश्चिम बंगाल और राजस्थान समेत उत्तर प्रदेश के 13 जिलों में एक साथ छापामारी की। इसी क्रम में संतकबीर नगर जिले के मेंहदावल से बीजेपी विधायक राकेश सिंह बघेल के गोरखपुर आवास पर भी छापा पड़ा। जानकार सूत्रों की मुताबिक इस मामले में संलिप्त कंस्ट्रक्शन कंपनी से उनके भाई का जुड़ाव है। सुबह से ही CBI टीम ने विधायक आवास को अपने कब्जे में ले सघन जांच-पड़ताल कर रही है। राप्तीनगर के गणेशपुरम स्थित विधायक के आवास पर सुबह से ही मीडिया का जमावड़ा लगा है

सीबीआई ने प्रदेश के 13 जिलों में 42 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। अकेले लखनऊ में ही 25 ठिकानों पर छापामारी की कार्रवाई की गयी है। ठीकेदार राकेश भाटी के घर भी छापा पड़ा है। श्री भाटी प्रदेश कांग्रेस के सदस्य हैं। लखनऊ, गोरखपुर के अलावा सीतापुर, रायबरेली, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, बुलंदशहर, इटावा, अलीगढ़, एटा, मुरादाबाद और आगरा में एक साथ छापेमारी की गई है। इस मामले में लखनऊ लखनऊ CBI कि एंटी करप्शन टीम ने लगभग 190 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। 407 करोड़ रुपए के इस घोटाले में कई सुपरिंटेंड इंजीनियर और अधिशासी इंजीनियरों के खिलाफ भी केस दर्ज है। इस मामले में सीबीआई ने सिंचाई विभाग की ओर से लखनऊ के गोमतीनगर थाने में दर्ज कराए गए मुकदमे को आधार बनाकर 30 नवंबर 2017 में नया मुकदमा दर्ज किया था। मुकदमे में सिंचाई विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता (अब सेवानिवृत्त) गुलेश चंद, एसएन शर्मा व काजिम अली, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता (अब सेवानिवृत्त) शिव मंगल यादव, अखिल रमन, कमलेश्वर सिंह, रूप सिंह यादव और अधिशासी अभियंता सुरेश यादव नामजद हैं। CBI अब इस आरोप की जांच कर रही है कि आखिर निर्धारित राशि का 95 फीसद बिना प्रोजेक्ट पूरा हुए कैसे खर्च हो गयी। लगभग 1513 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट था, जिसमें से 1437 करोड़ रुपये काम खर्च हो जाने के बाद भी 60 फीसदी काम भी पूरा नहीं हो पाया। इस पूरे मामले में यह भी पता चल रहा है कि पहले से ही ब्लैक लिस्टेड डिफ़ाल्टर कंपनी को काम दिया गया था।


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